कृषि पिटारा

ईरान-अमेरिका समझौते से खाद आपूर्ति सुधरने की उम्मीद बढ़ी

Iran-US Agreements

नई दिल्ली: भारतीय खाद उद्योग ने ईरान-अमेरिका समझौते और बातचीत पर बनी सहमति को राहत भरा कदम बताया है। उद्योग का मानना है कि इससे हॉर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने के बाद कच्चे माल, गैस और तैयार उर्वरकों की आपूर्ति में धीरे-धीरे सुधार आएगा। हालांकि कीमतों में कमी का असर तुरंत नहीं बल्कि समय के साथ देखने को मिलेगा।

खरीफ से पहले आपूर्ति मजबूत करने पर जोर

विशेषज्ञों के अनुसार अप्रैल और मई महीने खाद उत्पादन और भंडारण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि जून में वर्षा ऋतु के साथ खरीफ बुवाई शुरू हो जाती है। ऐसे में आपूर्ति श्रृंखला का सुचारू रहना बेहद जरूरी है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस समझौते से भारत को कच्चे माल जैसे फॉस्फोरिक अम्ल और सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ-साथ तैयार उर्वरकों की उपलब्धता में राहत मिलेगी।

कीमतों में गिरावट धीरे-धीरे संभव

उद्योग जगत का मानना है कि ईरान-अमेरिका समझौते के बावजूद वैश्विक स्तर पर ऊंची कीमतों की चिंता कुछ समय तक बनी रह सकती है। जैसे-जैसे आपूर्ति सामान्य होगी, कीमतों पर दबाव कम होगा। कीमतों में गिरावट का स्तर कच्चे तेल की कीमतों पर भी निर्भर करेगा, जो उर्वरक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कारक है।

गैस आपूर्ति और उत्पादन को मिलेगा सहारा

विशेषज्ञों के अनुसार युद्धविराम से तरलीकृत प्राकृतिक गैस की उपलब्धता में सुधार की संभावना है, जो यूरिया उत्पादन का मुख्य आधार है। इससे घरेलू उत्पादन को स्थिर करने और आयात लागत के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी पर भी रोक लग सकेगी।

सरकार के कदम से किसानों को राहत

सरकार ने खरीफ मौसम को ध्यान में रखते हुए बड़ी मात्रा में यूरिया आयात की प्रक्रिया शुरू की है। साथ ही उर्वरक संयंत्रों को गैस आपूर्ति बढ़ाकर उनकी उत्पादन क्षमता को मजबूत करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा खरीफ मौसम के लिए भारी सब्सिडी को मंजूरी दी गई है, जिससे किसानों को नियंत्रित दरों पर खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी।

वैश्विक संकट का सीधा असर भारत पर

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की उर्वरक व्यवस्था वैश्विक आपूर्ति तंत्र से गहराई से जुड़ी हुई है। पश्चिम एशिया में किसी भी तनाव का सीधा असर भारत पर पड़ता है, क्योंकि बड़ी मात्रा में गैस और उर्वरक वहीं से आते हैं। ऐसे में यह समझौता आपूर्ति स्थिर करने और बाजार में भरोसा बहाल करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रमुख उर्वरकों की खुदरा कीमतों में वृद्धि की अनुमति नहीं दी जाएगी, ताकि किसानों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और खेती की लागत नियंत्रित बनी रहे।

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