चंडीगढ़: हरियाणा में फसल खरीद व्यवस्था को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच विवाद गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य सरकार ने खरीद प्रणाली में सुधार किए हैं, जिससे पारदर्शिता और किसानों को सुविधा मिलेगी।
खरीद प्रक्रिया में सुधार और निगरानी व्यवस्था लागू
मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार ने सभी अनाज मंडियों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है और जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उपायुक्तों को खरीद व्यवस्था का प्रभारी बनाया गया है ताकि पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सके। सरकार का कहना है कि तकनीक आधारित इन उपायों से खरीद प्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और कार्यकुशल बनी है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा।
विपक्ष ने लगाए अव्यवस्था के आरोप
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मंडियों में अफरा-तफरी की स्थिति है और किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि पोर्टल पंजीकरण, गेट पास, जमानतदार, बायोमेट्रिक पहचान और अन्य प्रक्रियाओं के कारण किसान प्रशासनिक जाल में फंस रहे हैं और उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
तीन-स्तरीय सत्यापन प्रणाली लागू
सरकार ने फसल खरीद में तीन-स्तरीय सत्यापन प्रणाली लागू की है। इसके तहत किसानों द्वारा लाई गई फसल का मिलान पंजीकृत फसल से किया जाता है और आधार आधारित पहचान सत्यापन भी अनिवार्य किया गया है। आठ अप्रैल तक मंडियों में पहुंची लगभग पचहत्तर प्रतिशत गेहूं की फसल का बायोमेट्रिक सत्यापन सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। किसानों की सुविधा के लिए सत्यापन में तीन अधिकृत व्यक्तियों को भी अनुमति दी गई है।
जियो-फेंसिंग और डिजिटल निगरानी से नियंत्रण
राज्य की सैकड़ों गेहूं और सरसों मंडियों को जियो-फेंसिंग के दायरे में लाया गया है ताकि अनधिकृत गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। इसके अलावा भंडारण स्थलों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। गेट पास जारी करते समय वाहन की जानकारी और तस्वीरें लेना अनिवार्य कर दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर केवल तस्वीरों के आधार पर भी गेट पास जारी किया जा सकता है।
किसानों की सुविधा पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी सुधारों का उद्देश्य किसानों को बेहतर सुविधा देना और खरीद प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना है। साथ ही उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इन व्यवस्थाओं को सफल बनाने में सहयोग करें। सरकार और विपक्ष के बीच जारी इस विवाद के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीनी स्तर पर इन सुधारों का किसानों को कितना लाभ मिलता है।
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