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India-EU FTA: भारत के लिए 19वां बड़ा ट्रेड डील

India-EU FTA

नई दिल्ली: भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) ने मंगलवार को प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU FTA) को लेकर बातचीत पूरी होने और समझौते को फाइनल करने की घोषणा की। यह भारत के लिए 19वां ट्रेड डील होगा, जिससे 27 यूरोपीय देशों के इस बड़े समूह में भारतीय निर्यात को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस करार के जरिए भारत और EU के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने का लक्ष्य रखा गया है।

2014 के बाद सात बड़े ट्रेड पैक्ट

2014 के बाद भारत ने लगातार अपने वैश्विक व्यापार नेटवर्क को विस्तार दिया है। इस दौरान भारत ने सात प्रमुख ट्रेड पैक्ट्स को फाइनल किया है। इनमें मॉरीशस (अप्रैल 2021 में लागू), ऑस्ट्रेलिया (दिसंबर 2022 में लागू), UAE (मई 2022 में लागू), ओमान (दिसंबर 2025 में साइन), UK (जुलाई 2025 में साइन), EFTA (अक्टूबर 2025 में लागू स्विट्जरलैंड, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे) और न्यूजीलैंड (दिसंबर 2025 में बातचीत पूरी) शामिल हैं। India-EU FT इस श्रृंखला का एक अहम और सबसे बड़ा समझौता माना जा रहा है।

क्यों अहम है India-EU FTA?

अमेरिका द्वारा ऊंचे टैरिफ लगाए जाने के कारण वैश्विक स्तर पर वस्तुओं के प्रवाह में रुकावट आई है। भारत को कई उत्पादों पर करीब 50 प्रतिशत तक ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में EU के साथ FTA भारतीय निर्यातकों को अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने का अवसर देगा। इसके साथ ही यह चीन पर निर्भरता कम करने में भी सहायक होगा। EU खुद भी अमेरिका के ऊंचे टैरिफ के जोखिम का सामना कर रहा है, जिससे दोनों पक्षों के लिए यह समझौता रणनीतिक रूप से अहम बन जाता है।

भारत और EU दोनों को क्या मिलेगा फायदा

FTA के तहत टैरिफ या आयात शुल्क या तो पूरी तरह खत्म किए जाते हैं या काफी कम कर दिए जाते हैं। इससे बाजार खुलेंगे, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में समानता आएगी और टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा। भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार में प्रवेश आसान होगा, जबकि EU कंपनियों को भारत के तेजी से बढ़ते बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

कृषि उत्पादों पर बड़े फैसले

  • FTA में कृषि और खाद्य उत्पादों को लेकर अहम निर्णय लिए गए हैं। जैतून का तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेलों पर लगने वाली 45 प्रतिशत तक की ड्यूटी को पांच साल में पूरी तरह खत्म किया जाएगा, जिससे इन आयातित उत्पादों की कीमतें कम होंगी।
  • प्रोसेस्ड फूड जैसे ब्रेड, पेस्ट्री, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट और पेट फूड पर 50 प्रतिशत तक के ऊंचे टैरिफ पूरी तरह हटाए जाएंगे।
  • फलों के जूस और नॉन-अल्कोहलिक बीयर पर 55 प्रतिशत तक के आयात शुल्क को शून्य कर दिया जाएगा।
  • कीवी और नाशपाती पर 33 प्रतिशत की ड्यूटी को तय कोटे के तहत 10 प्रतिशत तक घटाया जाएगा।

कुल मिलाकर भारत में यूरोपीय कृषि-खाद्य निर्यात पर औसतन 36 प्रतिशत से अधिक के टैरिफ हटाए जाएंगे या काफी कम किए जाएंगे, जिससे उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प और कम कीमतें मिलेंगी।

136.53 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और EU के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 75.85 बिलियन डॉलर और आयात 60.68 बिलियन डॉलर रहा, जिससे EU भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार भागीदार बन गया। EU बाजार भारत के कुल निर्यात का करीब 17 प्रतिशत है, जबकि EU के कुल विदेशी शिपमेंट में भारत की हिस्सेदारी लगभग 9 प्रतिशत है।

सेवाओं में भी मजबूत साझेदारी

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने EU को 76 बिलियन डॉलर का सामान और 30 बिलियन डॉलर की सेवाएं निर्यात कीं। वहीं EU ने भारत को 61.5 बिलियन डॉलर का सामान और 23 बिलियन डॉलर की सेवाएं निर्यात कीं। EU के भीतर स्पेन, जर्मनी, बेल्जियम, पोलैंड और नीदरलैंड भारतीय निर्यातकों के लिए प्रमुख बाजार बने हुए हैं।

भारत का निर्यात और आयात प्रोफाइल

  • EU को भारत के प्रमुख निर्यात में पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स (स्मार्टफोन सहित), कपड़ा, मशीनरी और कंप्यूटर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, लोहा-इस्पात, रत्न और आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं।
  • वहीं EU से भारत के प्रमुख आयात में मशीनरी, कंप्यूटर और टर्बोजेट, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स, विमान, मेडिकल और वैज्ञानिक उपकरण, कच्चे हीरे, ऑर्गेनिक केमिकल्स, प्लास्टिक, लोहा-इस्पात, कारें और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं।

कुल मिलाकर India-EU FTA को भारत के निर्यात विस्तार, सप्लाई चेन मजबूती और वैश्विक व्यापार में उसकी स्थिति को और मजबूत करने वाला समझौता माना जा रहा है।

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