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सरकार ने राशन के चावल की गुणवत्ता सुधारने का लिया बड़ा फैसला

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने लगभग 30 वर्षों बाद चावल के गुणवत्ता मानकों में महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी है। इस फैसले का उद्देश्य करोड़ों लाभार्थियों तक बेहतर गुणवत्ता वाला चावल पहुंचाना, वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और खाद्य प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करना है।

राशन में मिलेगा बेहतर गुणवत्ता वाला चावल

नई व्यवस्था के तहत अब राशन में मिलने वाले कच्चे चावल में टूटे दानों की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं उसना चावल में टूटे दानों की सीमा 16 प्रतिशत से घटाकर केवल 5 प्रतिशत निर्धारित की गई है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को पहले की तुलना में बेहतर गुणवत्ता वाला चावल मिलेगा। साथ ही लाभार्थियों को मिलने वाली राशन की मात्रा में किसी प्रकार की कमी नहीं की जाएगी।

चरणबद्ध तरीके से लागू होगी नई व्यवस्था

सरकार बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की खरीद जल्द शुरू करेगी। इस नई व्यवस्था को खरीफ विपणन सत्र 2027-28 तक सभी खरीद करने वाले राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से नए मानकों के अनुसार चावल वितरित किया जाएगा।

टूटे चावल का होगा बेहतर उपयोग

नई व्यवस्था के अंतर्गत मिलिंग के दौरान निकलने वाले टूटे चावल को अलग किया जाएगा। इस चावल का उपयोग विभिन्न औद्योगिक और व्यावसायिक कार्यों में किया जाएगा। इससे लाभार्थियों तक अधिक साबुत और बेहतर गुणवत्ता वाला चावल पहुंच सकेगा।

सरकार को होगी लागत में बचत

सरकार के अनुसार टूटे चावल की सीधे मिलों से नीलामी, बेहतर भंडारण व्यवस्था और परिवहन लागत में कमी के कारण हर वर्ष लगभग 2,161 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। इसके अलावा टूटे चावल की बिक्री से अतिरिक्त आय भी प्राप्त होगी, जिससे खाद्य सब्सिडी के वित्तीय बोझ को कम करने में सहायता मिलेगी।

क्यूआर संकेत के माध्यम से बढ़ेगी पारदर्शिता

सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए चावल की बोरियों पर क्यूआर संकेत लगाने जा रही है। इससे चावल की पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी आसान होगी और कालाबाजारी जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था का सफल परीक्षण हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में किया जा चुका है। अब इसे पूरे देश में लागू करने की तैयारी की जा रही है।

फैसले से लाभार्थियों और व्यवस्था दोनों को फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि नए गुणवत्ता मानकों से करोड़ों लाभार्थियों को बेहतर चावल मिलेगा। वहीं पारदर्शिता बढ़ने, लागत घटने और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सकेगी। सरकार का यह कदम खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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