बाराबंकी: उत्तर प्रदेश में खाद की किल्लत और कीमतों को लेकर किसान परेशान हैं। ऐसी ही स्थिति बाराबंकी जिले में देखने को मिल रही है, जहां सरकारी खाद केंद्रों पर मोटे दाने की खाद तो उपलब्ध है, लेकिन अच्छी क्वालिटी वाली महीन खाद की भारी कमी बनी हुई है। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल के लिए महीन खाद जरूरी है, लेकिन केंद्रों पर यह खाद नदारद है, जिससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
सुबह से लंबी लाइनें, फिर भी खाली हाथ लौट रहे किसान
बाराबंकी के कई खाद केंद्रों पर सुबह से लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। किसान बताते हैं कि घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें मनपसंद खाद नहीं मिल पा रही है। केंद्रों पर यूरिया और महीन खाद के नाम पर सिर्फ मोटी खाद दी जा रही है। किसान रणधीर सिंह का आरोप है कि केंद्रों पर महीन खाद जानबूझकर रोकी जा रही है और इसकी आड़ में काला बाजारी की जा रही है। उनका कहना है कि सरकारी केंद्रों पर खाद की कमी है, जबकि निजी केंद्रों पर किसानों को खाद के साथ जबरदस्ती जिंक और अन्य उत्पाद खरीदने को मजबूर किया जाता है।
इफको और पीसीएफ केंद्रों पर भी कमी का संकट
बाराबंकी के इफको केंद्र पर यूरिया की भारी कमी देखने को मिली। केंद्र प्रभारी गुलाम अब्दुल कादिर ने जानकारी दी कि शुक्रवार को केंद्र पर 232 बैग यूरिया आए थे, जो कुछ ही देर में खत्म हो गए। वर्तमान में केंद्र पर कोई स्टॉक नहीं है और किसान अगले लोड का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह पीसीएफ फतेहाबाद केंद्र पर भी किसानों को केवल मोटी खाद मिल रही है, जबकि महीन खाद का कोई स्टॉक उपलब्ध नहीं है। किसान मजबूरी में वही खाद उठा रहे हैं, जो उनकी गेहूं फसल के लिए उपयुक्त नहीं है।
किसान बोले महीन खाद के बिना गुणवत्ता पर असर
किसानों का कहना है कि गेहूं के लिए मोटी खाद आदर्श नहीं मानी जाती। महीन खाद तेजी से घुलती है, जिससे पौधे की जड़ों को तुरंत पोषण मिलता है। लेकिन मौजूदा हालात में वे मोटी खाद लेने को विवश हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि खाद की कमी पूरी तरह से कालाबाजारी का परिणाम है। प्राइवेट केंद्रों पर खाद के साथ अतिरिक्त जिंक खरीदने का दबाव भी किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है।
रबी सीजन में संकट, बढ़ी चिंता
रबी सीजन की शुरुआत में इस खाद संकट ने किसानों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। गेहूं बुवाई के अहम समय में मिली इस कमी से उत्पादन घटने और फसल की सेहत बिगड़ने की आशंका बढ़ रही है। किसान लगातार प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं कि या तो महीन खाद का स्टॉक बढ़ाया जाए या निजी विक्रेताओं की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई हो।
कालाबाजारी पर योगी सरकार का सख्त रुख
इधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद की कालाबाजारी और मिलावट पर कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने साफ कहा कि नकली खाद बेचने वालों और कालाबाजारी में शामिल तत्वों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) तक के तहत कार्रवाई की जाएगी। योगी सरकार का कहना है कि किसानों की खाद जरूरत पूरी करना प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई तय है।
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