पशुपालन

बरसात में बकरियों को खिलाएँ हरा चारा, ये हैं फायदे

लखनऊ: बरसात का मौसम हरियाली के साथ-साथ पशुपालकों के लिए कई तरह की चुनौतियां भी लेकर आता है। जब पशु चिकित्सक यह सलाह देते हैं कि बरसात के दिनों में बकरियों को हरा चारा सीमित मात्रा में ही खिलाएं या खिलाने से पहले कुछ सावधानियां बरतें, तो कई पशुपालक चौंक जाते हैं। उन्हें लगता है कि हरा चारा नहीं देंगे तो बकरी दूध कैसे देगी या मांस के लिए उसका विकास कैसे होगा। इसी सोच के कारण कुछ पशुपालक विशेषज्ञों की बात को नजरअंदाज कर बकरियों को भरपूर हरा चारा खिलाते हैं, जिसका नतीजा यह होता है कि बकरी बीमार पड़ जाती है। बरसात के मौसम में खासतौर पर बकरियों में डायरिया और पेट में कीड़ों की समस्या तेजी से देखने को मिलती है, जिससे उत्पादन घटता है और कई बार जान का भी जोखिम बढ़ जाता है।

मथुरा स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी) के विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बकरी पालन के दौरान कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखा जाए तो बीमारी की पहचान पहले ही की जा सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर बकरी के पेट में कीड़े हैं, तो उसकी आंखों के रंग में बदलाव आने लगता है। हिमोकस नामक पैरासाइट बकरी के शरीर में पलने लगता है, जो खून चूसता है। सामान्य स्थिति में बकरी की आंखें चमकीली लाल या गुलाबी होती हैं, लेकिन जब हिमोकस की संख्या बढ़ती है तो आंखें हल्की गुलाबी और फिर सफेद होने लगती हैं, जो खून की कमी का स्पष्ट संकेत है।

बकरी की मेंगनी भी उसके स्वास्थ्य की जानकारी देती है। स्वस्थ बकरी की मेंगनी गोल और चमकदार होती है, जबकि बीमार बकरी की मेंगनी चिपकी हुई, गुच्छेदार या पेस्ट जैसी हो जाती है। यह इस बात का संकेत है कि बकरी की आंतों में संक्रमण हो चुका है या वह डायरिया से ग्रसित है। ऐसे में पशुपालक को चाहिए कि मेंगनी को जांच के लिए किसी पशु चिकित्सा प्रयोगशाला में भिजवाएं ताकि समय रहते सही उपचार हो सके। बकरी के मूत्र का रंग भी उसके स्वास्थ्य का आईना है। यदि मूत्र हल्का पीला है, तो स्थिति सामान्य है, लेकिन गहरे पीले रंग का मूत्र डिहाइड्रेशन का संकेत देता है। यदि मूत्र में लालपन नजर आने लगे, तो यह किसी आंतरिक चोट का लक्षण हो सकता है, और अगर मूत्र का रंग कॉफी जैसा हो जाए, तो यह खून में संक्रमण होने की ओर इशारा करता है।

बरसात के मौसम में बकरी पालन करते समय सावधानी बेहद जरूरी है। हरे चारे को थोड़ी देर धूप में सुखाकर या अन्य सूखे चारे के साथ मिलाकर देना चाहिए ताकि उसका प्रभाव बकरी के पेट पर न पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निगरानी, संतुलित खुराक और थोड़ी सी सजगता से बकरियों को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है। यह न सिर्फ उनके स्वास्थ्य को सुरक्षित रखेगा, बल्कि उत्पादन में गिरावट और आर्थिक नुकसान से भी बचाएगा।

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