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अंडों पर एक्सपायरी प्रिंट विवाद: पोल्ट्री संचालकों ने जताई लागत की चिंता

Expiry date on eggs

नई दिल्ली: अंडों पर एक्सपायरी तिथि प्रिंट करने को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। एक अप्रैल से इस नियम को लेकर जांच शुरू होने की बात कही जा रही थी, लेकिन बिना किसी आधिकारिक घोषणा के इसे फिलहाल रोक दिया गया है। हालांकि अंडों पर संबंधित जानकारी प्रिंट करने का आदेश कई वर्ष पहले जारी किया जा चुका है, लेकिन अभी तक इसका पूर्ण रूप से पालन नहीं हो सका है, जिससे पोल्ट्री किसानों और उपभोक्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस मुद्दे पर नेशनल ऐग कोऑर्डिनेशन कमेटी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह किसानों के हित में काम करती है और सरकार से भी यही अपेक्षा करती है कि कोई भी निर्णय लेने से पहले किसानों के हितों का ध्यान रखा जाए।

पुराने आदेश के बावजूद लागू नहीं हो सका नियम

ज्ञात हो कि वर्ष 2022 में भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण और राज्य सरकारों द्वारा अंडों की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्देश जारी किया गया था कि अंडों पर उनसे जुड़ी जानकारी, जिसमें एक्सपायरी तिथि भी शामिल है, प्रिंट की जाए। इसके साथ ही अंडों के भंडारण और परिवहन को लेकर भी नियम तय किए गए थे। फिर भी, जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है, जिससे इस नियम को लेकर लगातार भ्रम बना हुआ है।

मांग और आपूर्ति पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम आंशिक रूप से लागू किया गया तो मांग और आपूर्ति के संतुलन पर असर पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी राज्य में उत्पादन कम और खपत अधिक है, तो अन्य राज्यों से आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे अंडों की कीमतों में वृद्धि देखने को मिल सकती है। इस स्थिति में बाजार में असंतुलन पैदा होने की आशंका जताई जा रही है, जो उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के लिए चुनौती बन सकती है।

लागत बढ़ने से किसानों की बढ़ेगी परेशानी

अंडों पर प्रिंटिंग लागू करने के लिए विशेष मशीनों की आवश्यकता होगी, जिसके कारण किसानों को एकमुश्त बड़ा निवेश करना पड़ेगा। इसके अलावा मशीन संचालन के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत भी पड़ेगी, जिससे उत्पादन लागत में बढ़ोतरी होगी। पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इस अतिरिक्त लागत का भार अंततः किसानों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। ऐसे में उन्होंने सरकार से मांग की है कि कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखा जाए, ताकि इस क्षेत्र में अनावश्यक आर्थिक दबाव न बढ़े।

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