लखनऊ: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई प्रदेश कैबिनेट बैठक में गोरखपुर में ‘उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय’ की स्थापना को मंजूरी दे दी गई है। इसके लिए अध्यादेश को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे राज्य में शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कैम्पियरगंज में बनेगा नया विश्वविद्यालय
यह विश्वविद्यालय गोरखपुर के कैम्पियरगंज क्षेत्र में लगभग पचास हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना पर चार सौ इक्यानवे करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। राज्य सरकार ने इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष के बजट में पचास करोड़ रुपये की व्यवस्था भी की है।
कृषि और पर्यावरण शोध को मिलेगा बढ़ावा
इस विश्वविद्यालय में वानिकी, औद्यानिकी, वन्य जीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि वानिकी तथा फल-बागवानी जैसे विषयों में स्नातक, परास्नातक, शोध और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य वन क्षेत्र का विस्तार, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना और किसानों व छात्रों को आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
जटायु संरक्षण केंद्र के पास होगा निर्माण
विश्वविद्यालय की स्थापना जटायु संरक्षण केंद्र के समीप की जाएगी, जो पहले से ही गोरखपुर में स्थापित है। इससे इस क्षेत्र को पर्यावरण संरक्षण के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
रोजगार के नए अवसर खुलेंगे
अधिकारियों के अनुसार इस संस्थान के शुरू होने से युवाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही कृषि और पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रों में विशेषज्ञ तैयार किए जा सकेंगे। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब शिलान्यास की तैयारियां तेज कर दी गई हैं और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
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