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बिहार में डेयरी किसानों को मिलेगा ब्याजमुक्त ऋण, सरकार देगी सब्सिडी

Dairy farmers in Bihar will get interest-free loans, government will provide subsidy

पटना: बिहार सरकार राज्य में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने और ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना लागू करने जा रही है। इस योजना के तहत पात्र पशुपालकों को दुधारू गाय या भैंस खरीदने के लिए बैंक से ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। सबसे बड़ी राहत यह है कि ऋण पर लगने वाले ब्याज की पूरी राशि सरकार वहन करेगी। यानी लाभार्थियों को केवल ऋण की मूल राशि चुकानी होगी। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक तीन वर्षों के लिए इस योजना के क्रियान्वयन पर लगभग 160 करोड़ रुपये खर्च करने की स्वीकृति दी है। इस पहल का उद्देश्य छोटे किसानों, बेरोजगार युवाओं और ग्रामीण पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ना है। इससे राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

तीन गाय या दो भैंस खरीदने के लिए मिलेगा ऋण

मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना के तहत लाभार्थी तीन उन्नत नस्ल की गाय या दो भैंस खरीदने के लिए बैंक ऋण ले सकेंगे। योजना में ब्याज पर 100 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इससे डेयरी व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक लोगों को शुरुआती निवेश का बोझ कम करने में मदद मिलेगी। आमतौर पर दुधारू पशु खरीदने के लिए बड़ी रकम की जरूरत होती है। छोटे किसानों और ग्रामीण युवाओं के पास पर्याप्त पूंजी नहीं होने के कारण वे डेयरी व्यवसाय शुरू नहीं कर पाते। सरकार की इस योजना से उन्हें बैंक ऋण के माध्यम से पशु खरीदने का अवसर मिल सकेगा। हालांकि, ऋण की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, बैंक संबंधी शर्तों और भुगतान की विस्तृत जानकारी के लिए विभागीय दिशा-निर्देशों का इंतजार करना होगा।

तीन वर्षों में 160 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी सरकार

बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से जारी स्वीकृति के अनुसार, मुख्यमंत्री गो-धन विकास ऋण योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक लगभग 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि से योजना को तीन वर्षों तक संचालित करने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य डेयरी को केवल पारंपरिक पशुपालन तक सीमित न रखकर इसे ग्रामीण स्वरोजगार के एक व्यवस्थित माध्यम के रूप में विकसित करना है। इससे किसानों को खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का विकल्प मिल सकता है।

कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास के लिए 126 करोड़ रुपये की परियोजना

बिहार सरकार ने कोसी क्षेत्र में डेयरी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी बड़ी परियोजना को मंजूरी दी है। इसके तहत सुपौल, मधेपुरा और सहरसा जिलों में डेयरी से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत 126.07 करोड़ रुपये है। इस योजना में दही और प्रीमियम आइसक्रीम संयंत्र, पशु आहार के लिए टोटल मिक्स्ड राशन संयंत्र, भैंस के बछड़ों के पालन के लिए फार्म और उन्नत प्रजनन तकनीकों से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा नई दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां गठित करने, दूध शीतलन संयंत्र स्थापित करने और दूध को तेजी से ठंडा करने वाली आधुनिक व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।

पांच साइलेंज संयंत्र भी किए जाएंगे स्थापित

पशुओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए बिहार सरकार ने पांच साइलेंज-सह-टीएमआर संयंत्र स्थापित करने की भी स्वीकृति दी है। प्रत्येक संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन 20 मीट्रिक टन होगी। इन पांच संयंत्रों की स्थापना पर कुल 19.15 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है। इन संयंत्रों से पशुओं के लिए संतुलित आहार तैयार करने और चारे की उपलब्धता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इससे डेयरी किसानों को पशुओं के पोषण और दूध उत्पादन में सुधार का अवसर मिल सकता है।

गांव-गांव में बनेंगी दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां

बिहार सरकार का लक्ष्य राज्य के प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति गठित करना है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच राज्य में 4,804 नई समितियां गठित की गईं। इसके साथ ही सक्रिय समितियों की कुल संख्या बढ़कर 33,897 हो गई है। फिलहाल राज्य में प्रतिदिन लगभग 23.90 लाख किलोग्राम दूध का संग्रह किया जा रहा है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसे बढ़ाकर प्रतिदिन 50 लाख लीटर करने का लक्ष्य रखा है। दूध संग्रह और परिवहन व्यवस्था की निगरानी के लिए एकीकृत नियंत्रण एवं निगरानी केंद्र भी स्थापित किया गया है।

किसानों और पशुपालकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है योजना?

बिहार सरकार की इन पहलों से डेयरी क्षेत्र में कई स्तरों पर बदलाव की उम्मीद है। पशु खरीदने के लिए ब्याजमुक्त ऋण मिलने से नए लोग इस व्यवसाय से जुड़ सकेंगे। वहीं, दूध संग्रह केंद्रों, शीतलन संयंत्रों और सहकारी समितियों का विस्तार होने से पशुपालकों को अपना दूध बेचने के लिए बेहतर व्यवस्था मिल सकती है। हालांकि, योजना का लाभ लेने से पहले किसानों को आवेदन की पात्रता, जरूरी दस्तावेज, ऋण की अधिकतम सीमा और बैंक की शर्तों की आधिकारिक जानकारी जरूर प्राप्त करनी चाहिए। योजना की विस्तृत आवेदन प्रक्रिया और दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही लाभार्थियों के लिए आवेदन संबंधी पूरी जानकारी स्पष्ट होगी। बिहार सरकार की कोशिश है कि डेयरी व्यवसाय के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़े, दूध उत्पादन में वृद्धि हो और किसानों को खेती के साथ नियमित आमदनी का एक अतिरिक्त स्रोत मिल सके।

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