नई दिल्ली: गांवों में पशुपालन करने वाले किसानों और पशुपालकों के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल की है। अब ग्रामीण रोजगार योजना के तहत केवल मजदूरी आधारित कार्यों तक ही गतिविधियां सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने, चारागाह विकसित करने और पशुपालन से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है। इसमें चारा उत्पादन, चारागाह विकास और पशुपालन से जुड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 22 तरह के कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाना है। इससे पशुओं के लिए सालभर चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पशु आश्रय, दूध संग्रह और पशु चिकित्सा जैसी सुविधाओं को भी गांवों के स्तर पर मजबूत किया जा सकेगा। केंद्र सरकार का मानना है कि इस तरह के कार्य ग्रामीण परिवारों की आजीविका को स्थायी आधार देने में मददगार होंगे।
पशुओं के लिए सालभर चारे की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक सालभर हरे और पौष्टिक चारे की उपलब्धता है। गर्मियों और सूखे के दौरान कई इलाकों में चारे की कमी हो जाती है। इससे पशुओं के पोषण, दूध उत्पादन और पशुपालकों की आमदनी पर असर पड़ता है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत चारा उत्पादन और चारा संसाधनों के विकास से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। इसके तहत किसानों के निजी खेतों में चारा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही सामुदायिक जमीन पर चारा संसाधन विकसित करने, चारागाह तैयार करने और चराई भूमि का विकास करने जैसे कार्य भी किए जा सकेंगे। इससे उन पशुपालकों को विशेष लाभ मिल सकता है, जिनके पास पशुओं के लिए पर्याप्त जमीन या चारा उत्पादन के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
चारा बैंक और साइलेज इकाइयां भी बनाई जा सकेंगी
चारे की उपलब्धता को पूरे साल बनाए रखने के लिए चारा बैंक और साइलेज इकाइयों के निर्माण को भी इस पहल में शामिल किया गया है। चारा बैंक के माध्यम से जरूरत के समय पशुपालकों को चारा उपलब्ध कराया जा सकेगा। वहीं, साइलेज बनाने की व्यवस्था से हरे चारे को संरक्षित करके बाद में पशुओं के आहार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे चारे की मौसमी कमी से निपटने में मदद मिलेगी।
गांवों में बनेंगे पशु आश्रय और दूध संग्रह केंद्र
केंद्र सरकार की एडवाइजरी में पशुओं के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी महत्व दिया गया है। इसके तहत गांवों में नए पशु आश्रयों का निर्माण किया जा सकेगा। पहले से बने पशु आश्रयों की मरम्मत और रखरखाव के कार्य भी कराए जा सकेंगे। इससे पशुओं को सुरक्षित और बेहतर आवास उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसके अलावा सामुदायिक दूध संग्रह केंद्र स्थापित करने, पशु चिकित्सा केंद्रों के निर्माण और पशुओं के लिए पानी पीने की नांद तैयार करने जैसे कार्य भी प्राथमिकता में रखे गए हैं। गांवों में दूध संग्रह केंद्र विकसित होने से पशुपालकों को दूध एकत्र करने और उसे आगे भेजने की बेहतर सुविधा मिल सकती है। वहीं, पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से बीमार पशुओं के उपचार और देखभाल में मदद मिलेगी।
व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए बन सकेंगे एजोला टैंक
इस योजना के तहत व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए एजोला टैंक बनाने का काम भी शामिल किया गया है। एजोला एक जलीय फर्न है, जिसका इस्तेमाल पशुओं के पूरक आहार के रूप में किया जाता है। इसमें प्रोटीन सहित कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे कम जगह और अपेक्षाकृत कम लागत में उगाया जा सकता है। पशुओं के नियमित आहार में उचित मात्रा में एजोला शामिल करने से उनके पोषण में सुधार करने में मदद मिल सकती है।
पशुपालन पर निर्भर परिवारों वाले गांवों को मिलेगी प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने राज्यों को सलाह दी है कि वे उन ग्राम पंचायतों में चारा विकास और पशुपालन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दें, जहां 30 प्रतिशत से अधिक आबादी की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है। इससे उन गांवों को पहले लाभ पहुंचाने की कोशिश होगी, जहां खेती के साथ पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आय का प्रमुख साधन है। इसके अलावा राज्यों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे धीरे-धीरे वीबी-जी राम जी कार्यक्रम के कुल खर्च का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा चारा विकास और पशुपालन से जुड़े बुनियादी ढांचे पर खर्च करें। यह राशि स्थानीय जरूरतों और स्वीकृत योजनाओं के आधार पर खर्च की जाएगी। हालांकि, यह राज्यों को दिया गया प्रोत्साहन है, इसे प्रत्येक राज्य के लिए तत्काल अनिवार्य खर्च का लक्ष्य नहीं समझना चाहिए।
ग्रामीण परिवारों को 125 दिन के रोजगार की गारंटी
वीबी-जी राम जी अधिनियम 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ है। इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वित्त वर्ष में 125 दिन के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। इस कानून का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ गांवों में ऐसी टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना है, जिनका लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सके। चारा उत्पादन, चारागाह विकास और पशुपालन से जुड़े बुनियादी ढांचे के कार्य इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने का हिस्सा हैं। इनसे एक ओर ग्रामीण परिवारों को मजदूरी आधारित रोजगार मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर गांवों में पशुपालन के लिए जरूरी संसाधन विकसित होंगे। इससे पशुपालकों को चारे और दूसरी सुविधाओं के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
ग्राम सभा की मंजूरी से तय होंगे विकास कार्य
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि चारा विकास और पशुपालन से जुड़े कार्यों की योजना ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार की जाएगी। इन कार्यों को विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं में शामिल किया जाएगा और ग्राम सभा से उनकी मंजूरी ली जाएगी। यानी गांव में किस तरह के चारा संसाधन या पशुपालन सुविधाओं की जरूरत है, इसका निर्धारण स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। राज्यों को ग्रामीण विकास, कृषि और पशुपालन विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की सलाह भी दी गई है। इसके लिए चारा सुरक्षा से जुड़ी अलग कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय घासभूमि एवं चारा अनुसंधान संस्थान की ओर से तैयार राज्यवार चारा विकास योजनाओं का भी इसमें उपयोग किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग राज्यों की जलवायु, मिट्टी और पशुधन की जरूरतों के अनुसार चारा विकास की योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।
कार्यों में पारदर्शिता के लिए सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य
योजना के तहत होने वाले कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने और गड़बड़ियों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने कई नियम भी स्पष्ट किए हैं। सभी कार्य अधिनियम के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही किए जाएंगे। इनमें सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य होगा, ताकि स्थानीय स्तर पर कार्यों और खर्च की निगरानी की जा सके। इसके अलावा सामग्री पर होने वाला खर्च जिला स्तर पर कुल खर्च के 40 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगा। व्यक्तिगत लाभार्थियों का चयन अधिनियम की अनुसूची-1 में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा। कार्यों और खर्च की साप्ताहिक सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराने के साथ शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था भी लागू रहेगी।
पशुपालकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
ग्रामीण रोजगार योजना के तहत चारा उत्पादन, चारागाह और पशुपालन से जुड़ी सुविधाओं को प्राथमिकता मिलने से पशुपालकों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की संभावना है। गांवों में चारा संसाधन विकसित होने से पशुओं के लिए भोजन की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। पशु आश्रय, पानी की नांद और चिकित्सा केंद्र जैसी सुविधाएं पशुओं की देखभाल को आसान बना सकती हैं। वहीं, दूध संग्रह केंद्रों के विकास से स्थानीय स्तर पर दुग्ध उत्पादन से जुड़ी व्यवस्था मजबूत हो सकती है। हालांकि, इस पहल का वास्तविक लाभ राज्यों और ग्राम पंचायतों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। यदि स्थानीय जरूरतों के अनुसार सही कार्यों का चयन किया जाता है और उनका नियमित रखरखाव सुनिश्चित होता है, तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को मजबूत करने के साथ किसानों और पशुपालकों की आजीविका को भी बेहतर आधार दे सकती है।
ये भी पढ़ें: पशुओं के लिए ये 8 चारे हैं पोषण से भरपूर, जानें फायदे

