कृषि समाचार

महाराष्ट्र के 304 तालुकों में सूखा, किसानों के लिए राहत के बड़े फैसले

Drought in 304 talukas of Maharashtra, major decisions for relief for farmers

मुंबई: महाराष्ट्र में सूखे के गंभीर हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों और ग्रामीण परिवारों को राहत देने के लिए कई अहम फैसले किए हैं। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन किसानों के निजी कुओं का इस्तेमाल पिछले दो वर्षों में पेयजल और पानी की कमी दूर करने के लिए किया गया था, उन्हें 20 नवंबर तक बकाया भुगतान कर दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसानों को समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो वे भविष्य में अपने कुओं का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देंगे। सूखा प्रबंधन को लेकर बुधवार को राज्य कैबिनेट की उप-समिति की बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने की। बैठक में सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता, किसानों को आर्थिक सहायता, चारे की व्यवस्था और ग्रामीण रोजगार सहित कई मुद्दों पर चर्चा की गई। सरकार के मुताबिक, महाराष्ट्र के 358 में से 304 तालुकों में सूखा घोषित किया जा चुका है। यानी राज्य के लगभग 85 प्रतिशत तालुका सूखे की चपेट में हैं।

20 नवंबर तक किसानों को कुओं का बकाया भुगतान

सूखा प्रभावित इलाकों में पानी की कमी दूर करने के लिए कई किसानों ने अपने निजी कुओं से प्रशासन को पानी उपलब्ध कराया था। इसके बदले किसानों को भुगतान किया जाना था, लेकिन कई मामलों में यह राशि अब तक बकाया है। राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पिछले दो वर्षों का लंबित भुगतान 20 नवंबर तक पूरा किया जाए। मंत्री ने कहा कि किसानों को समय पर पैसा मिलना चाहिए। यदि प्रशासन भुगतान करने में देरी करता है, तो किसान आगे अपने निजी कुओं का इस्तेमाल जल संकट से निपटने के लिए करने की अनुमति नहीं देंगे। इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने संकट के समय अपने जल संसाधनों का इस्तेमाल सार्वजनिक जरूरतों के लिए करने दिया था।

जल जीवन मिशन के अधूरे काम जल्द होंगे पूरे

बैठक में जल जीवन मिशन के तहत लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने का भी फैसला लिया गया। सरकार के अनुसार, योजना के लगभग 75 प्रतिशत काम पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष 25 प्रतिशत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सूखा प्रभावित गांवों में पेयजल की समस्या को देखते हुए इन कार्यों को जल्द पूरा करना जरूरी माना जा रहा है। इसके अलावा सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में फलों के बागों को बचाने और पानी के मौजूदा स्रोतों को दोबारा उपयोगी बनाने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का प्रयास है कि उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करके किसानों को फसलों और बागवानी को बचाने में मदद दी जा सके।

चारे की कमी दूर करने के लिए दूसरे जिलों से होगी आपूर्ति

सूखे के कारण पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बन सकती है। इसे देखते हुए सरकार ने चारा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने का फैसला किया है। जिन जिलों में चारा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, वहां से जरूरतमंद और सूखा प्रभावित जिलों तक चारा पहुंचाया जाएगा। इससे पशुपालकों को राहत मिलने और पशुओं के लिए भोजन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

छोटी परियोजनाओं के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान

राज्य सरकार ने पांच करोड़ रुपये से कम लागत वाली विकास योजनाओं के लिए कम से कम 500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इन योजनाओं को अगले तीन महीनों में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयार किया जाएगा। इनका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पानी और दूसरी बुनियादी जरूरतों से जुड़े कार्यों को गति देना है। इसके साथ ही जिला योजना समितियों के बजट में बढ़ोतरी और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कार्यों को जिला स्तरीय योजनाओं से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इससे एक ही काम के लिए अलग-अलग योजनाओं के तहत दोबारा धन खर्च होने की आशंका कम होगी और उपलब्ध बजट का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

बिना जमीन के दस्तावेज वाले किसानों को भी मिलेगा लाभ

सरकार ने उन परिवारों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया है, जो सरकारी, मंदिर या अन्य जमीनों पर खेती करते हैं, लेकिन उनके पास खेती से जुड़े औपचारिक दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे परिवारों की संख्या लगभग चार से पांच लाख बताई गई है। दस्तावेजों के अभाव में कई बार ये परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अधिकारियों को ऐसे परिवारों की सहायता के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र परिवारों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके। इसके अलावा किसानों को परती और अन्य उपलब्ध जमीनों पर ज्वार, मक्का और चना जैसी फसलें उगाने की अनुमति देने पर भी विचार किया जा रहा है। इससे सूखे की स्थिति में खेती के वैकल्पिक विकल्प विकसित करने में मदद मिल सकती है।

13 और तालुकों में सूखा घोषित करने पर विचार

महाराष्ट्र सरकार सूखा प्रभावित क्षेत्रों की सूची में 13 और तालुकों को शामिल करने पर विचार कर रही है। इसके लिए अधिकारियों को 15 नवंबर तक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके देने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट के आधार पर उन क्षेत्रों की स्थिति का आकलन किया जाएगा, जहां सूखा घोषित करने की आवश्यकता हो सकती है। गौरतलब है कि सरकार ने इससे पहले दिवाली से पहले किसानों को पांच हजार रुपये की शुरुआती आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। अब निजी कुओं का बकाया भुगतान, पेयजल योजनाओं को पूरा करने, चारे की आपूर्ति और ग्रामीण विकास कार्यों के लिए बजट उपलब्ध कराने जैसे फैसलों के जरिए राहत पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इन फैसलों का वास्तविक लाभ किसानों तक कितनी जल्दी पहुंचता है, यह इनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। फिलहाल महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में सूखे की स्थिति को देखते हुए किसानों और पशुपालकों की नजर सरकार की राहत योजनाओं पर टिकी हुई है।

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