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बिहार: खुरपका-मुंहपका से बचाव के लिए तेज हुआ टीकाकरण अभियान

Vaccination drive intensified to prevent disease

पटना, 03 अगस्त 2026: मॉनसून के दौरान राज्यभर में खरीफ फसलों की खेती के साथ पशुपालन भी तेजी से चल रहा है। ऐसे समय में पशुपालकों को अपने पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है। वर्षा ऋतु में खुरपका-मुंहपका रोग के फैलने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने पशुओं के लिए निःशुल्क खुरपका-मुंहपका टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है। 10 जुलाई से अभियान के सातवें चरण की शुरुआत हो चुकी है और अब तक 79 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। इस अभियान से अब तक 16 लाख से अधिक पशुपालक लाभान्वित हुए हैं।

घर-घर पहुंचकर लगाया जा रहा है निःशुल्क टीका

सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत प्रशिक्षित टीकाकर्मी घर-घर जाकर गाय, बैल, बछड़ा, बछड़ी और भैंसों का निःशुल्क टीकाकरण कर रहे हैं। जिन पशुपालकों ने अभी तक अपने पशुओं का टीकाकरण नहीं कराया है, उनसे जल्द से जल्द नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सक से संपर्क कर टीका लगवाने की अपील की गई है। राज्य के सभी 38 जिलों में अभियान चल रहा है। अब तक पूर्णिया में सबसे अधिक लगभग 5.98 लाख, पटना में लगभग 4.89 लाख और पूर्वी चंपारण में लगभग 4.61 लाख पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।

वर्ष 2030 तक रोग के उन्मूलन का लक्ष्य

राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक खुरपका-मुंहपका रोग पर प्रभावी नियंत्रण और उसके उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2.81 करोड़ पशुओं का टीकाकरण किया गया था, जिससे 50 लाख से अधिक पशुपालकों को लाभ मिला। राज्य में यह अभियान वर्ष 2006 से लगातार संचालित किया जा रहा है।

दूध उत्पादन पर पड़ता है सीधा असर

बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के पशु वैज्ञानिक डॉक्टर दुष्यंत कुमार यादव के अनुसार, वर्षा ऋतु में खुरपका-मुंहपका रोग का संक्रमण तेजी से फैलता है। इस बीमारी से पशुओं की सेहत प्रभावित होने के साथ-साथ दूध उत्पादन में भी उल्लेखनीय कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से निःशुल्क टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, इसलिए सभी पशुपालकों को इसका लाभ उठाना चाहिए। समय पर टीकाकरण कराने से पशुओं को गंभीर संक्रमण से बचाया जा सकता है और उत्पादन क्षमता भी सुरक्षित रहती है।

देश को हर वर्ष होता है भारी आर्थिक नुकसान

खुरपका-मुंहपका रोग के कारण देश को प्रतिवर्ष लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान होता है। इस बीमारी का असर पशु उत्पादों के निर्यात पर भी पड़ता है, जिससे पशुधन क्षेत्र की आय प्रभावित होती है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने सभी पशुपालकों से अभियान में सक्रिय सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पशुओं का टीकाकरण कराकर सभी लोग खुरपका-मुंहपका मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने में अपनी भागीदारी निभाएं। विभाग ने किसी भी शिकायत या सुझाव के लिए टोल फ्री नंबर 1962 पर संपर्क करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई है।

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