नई दिल्ली: मछली पालन में मछलियों को स्वस्थ और तेजी से बढ़ने के लिए फीड और दवाओं का इस्तेमाल जरूरी होता है, लेकिन इसके साथ ही तालाब का पानी साफ-सुथरा और प्रदूषण मुक्त होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। फिशरीज एक्सपर्टों का कहना है कि मछलियों की सेहत सीधे तालाब के पानी की गुणवत्ता से जुड़ी होती है। जब पानी स्वस्थ होगा तो मछलियां भी तेजी से बढ़ेंगी, उनका वजन भी अच्छा होगा और वे बीमारियों से भी दूर रहेंगी। अच्छी सेहत वाली मछली का बाजार में बेहतर दाम मिलता है, इसलिए मछली पालन में पानी की सफाई का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है।
खासकर बरसात के दिनों में तालाब का पानी प्रदूषित होने की संभावना बढ़ जाती है। बारिश के कारण तालाब का पानी जल्दी गंदा हो जाता है और उसका रंग हरा होने लगता है। इसलिए मछली के बीज डालने से पहले तालाब से जलीय खर-पतवार को पूरी तरह हटा देना चाहिए ताकि पानी साफ रहे और मछलियों के विकास में कोई बाधा न आए। इसके लिए तालाब में चूने और गोबर का उपयोग भी अत्यंत प्रभावी माना जाता है, जो पानी को प्रदूषण मुक्त रखने में मदद करता है।
बड़ी मछलियों के तालाब और नर्सरी तालाब की देखभाल में भी कुछ खास बातें ध्यान रखनी चाहिए। जैसे ही तालाब के पानी का रंग हरा होने लगे, चूने और गोबर के उपयोग को 15 दिन से एक महीने के लिए रोक देना चाहिए। बरसात के दौरान जब बारिश अधिक हो, तब प्रति एकड़ तालाब में 15 से 20 किलो चूना घोल बनाकर डालना आवश्यक होता है। नर्सरी तालाब से मछली के बीज निकालने से एक दिन पहले फीड बंद कर देना चाहिए और तालाब को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले सुखा लेना चाहिए।
नर्सरी तालाब की पुनः तैयारी में गोबर और चूने का सही मात्रा में उपयोग किया जाना चाहिए। प्रति एकड़ तालाब में लगभग एक से दो हजार किलो गोबर और 50 किलो चूना डालकर तालाब में एक फिट पानी भरना चाहिए। इसके बाद पांच से सात दिन तक इंतजार कर फिर तालाब में पांच फिट तक पानी भर देना चाहिए। पानी भरने के बाद एक एकड़ तालाब में लगभग 20 लाख मछली के बीज (स्पॉन) डालने की सलाह दी जाती है। मछली के बीज को ट्रांसपोर्ट करते समय ठंडे वातावरण का इस्तेमाल करना भी आवश्यक होता है ताकि उनकी सेहत बनी रहे।
तालाब से खरपतवार हटाने के लिए एक एकड़ तालाब में तीन किलोग्राम 2-4 D दवा का उपयोग किया जा सकता है, जिससे जलीय खर-पतवार नियंत्रित रहते हैं और पानी की गुणवत्ता बनी रहती है।
इस प्रकार, मछली पालन में तालाब के पानी की नियमित सफाई, उचित देखभाल और वैज्ञानिक तरीके से चूने-गोबर तथा दवाओं का उपयोग मछलियों की बढ़वार और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। इन उपायों को अपनाकर मछली पालन से बेहतर उत्पादन और आर्थिक लाभ हासिल किया जा सकता है।
