नई दिल्ली: साल 2026 की शुरुआत में मजबूती दिखाने वाला सोयाबीन बाजार अब साल की दूसरी छमाही में दबाव में आ सकता है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती बुवाई और उत्पादन के चलते कीमतों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
बढ़ती बुवाई से सप्लाई में इजाफा
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में किसान इस बार मक्का की तुलना में सोयाबीन की बुवाई बढ़ाने की तैयारी में हैं। इससे वैश्विक बाजार में सोयाबीन की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों की तेजी सीमित हो सकती है। अनुमान है कि कुल रकबे में वृद्धि के साथ उत्पादन भी बढ़ेगा।
मौजूदा तेजी टिकाऊ नहीं
विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में कीमतों में जो तेजी देखी जा रही है, वह लंबे समय तक नहीं टिकेगी। जैसे ही बाजार का फोकस उत्पादन और सप्लाई पर जाएगा, कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
वैश्विक उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोयाबीन उत्पादन में बढ़ोतरी के संकेत हैं। आने वाले सीजन में कुल उत्पादन और उपलब्धता दोनों में इजाफा होने की संभावना है, जिससे बाजार में संतुलन बिगड़ सकता है।
ब्राजील की फसल बनेगी बड़ा कारक
दुनिया के प्रमुख निर्यातक देशों में शामिल ब्राजील में लगातार रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद है। इससे वैश्विक बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी, जो कीमतों को नीचे रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।
मांग और निर्यात में अनिश्चितता
हालांकि कुछ देशों के बीच व्यापार समझौतों के चलते मांग बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन वास्तविक निर्यात आंकड़े अभी कमजोर बने हुए हैं। अगर मांग अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ती है, तो कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
आगे के लिए क्या संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2026 के दूसरे हिस्से में नई फसल आने और सप्लाई बढ़ने से सोयाबीन के दाम में गिरावट देखी जा सकती है। हालांकि वैश्विक व्यापार समझौते और मौसम की स्थिति जैसे कारक भविष्य में कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। कुल मिलाकर, बढ़ती सप्लाई और अनिश्चित मांग के बीच सोयाबीन बाजार आने वाले समय में संतुलन की चुनौती का सामना कर सकता है।
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