पटना: बिहार सरकार 23 जून से राज्यभर में कृषि महाअभियान की शुरुआत करने जा रही है, जिसका उद्देश्य लघु और सीमांत किसानों को आसानी से कृषि ऋण उपलब्ध कराना है। इस अभियान के तहत करीब 60 लाख किसानों को 1.20 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण देने का लक्ष्य तय किया गया है। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने बताया कि इस पहल के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को किसान ऋण कार्ड योजना से जोड़ा जाएगा।
सस्ती ब्याज दर पर मिलेगा ऋण
किसान ऋण कार्ड के तहत किसानों को 7 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण मिलता है। समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को 4 प्रतिशत ब्याज में छूट दी जाती है, जिसमें 3 प्रतिशत केंद्र सरकार और 1 प्रतिशत राज्य सरकार की ओर से दिया जाता है। इससे किसानों के लिए ऋण लेना काफी सस्ता हो जाता है।
डिजिटल माध्यम से आसान होगी प्रक्रिया
सरकार ने ऋण वितरण प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत किया है। इसके तहत जन समर्थ पोर्टल को कृषि आंकड़ा प्रणाली और ई-केसीसी मंच से जोड़ा जा रहा है। इससे किसानों की भूमि संबंधी जानकारी स्वतः उपलब्ध हो सकेगी और ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार
राज्य में अब तक लगभग 55 लाख किसानों को कृषि आंकड़ा प्रणाली से जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े करीब 20 लाख लोगों का डिजिटल डाटा भी तैयार किया गया है। इन आंकड़ों के आधार पर पात्र किसानों और पशुपालकों को अभियान के तहत ऋण कार्ड से जोड़ा जाएगा।
सहयोग शिविरों में लगाए जाएंगे विशेष कैंप
अभियान के दौरान पूरे राज्य में 15 दिनों तक सहयोग शिविर लगाए जाएंगे, जहां किसान ऋण कार्ड के लिए विशेष कैंप आयोजित होंगे। इन शिविरों में प्राप्त आवेदनों को तुरंत पोर्टल पर दर्ज कर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस पहल के लिए बैंकों ने भी सहमति दे दी है।
ऋण वितरण में तेजी का दावा
समीक्षा बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण की प्रगति पर भी चर्चा हुई। जानकारी के अनुसार किसान ऋण कार्ड के तहत 13.24 लाख खातों में 16,500 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है, जबकि वार्षिक साख योजना के मुकाबले 76,193.87 करोड़ रुपये का वितरण किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि इस अभियान से किसानों को समय पर और सुलभ ऋण उपलब्ध होगा, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
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