सर्दियों का मौसम बकरी पालन के लिए चुनौती भरा होता है। इस मौसम में बकरियों को ठंढ से बचाना ज़रूरी होता है। ठंड के चलते बकरी के बच्चे निमोनिया से ग्रसित हो जाते हैं और बड़े बकरे-बकरियां सर्दी के साथ-साथ दस्त जैसी बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। जमीन की ठंडक और यूरिन मिलकर दोहरा नुकसान करते हैं, जिससे दूध और मीट का उत्पादन भी प्रभावित होता है। ऐसे हालात में बकरियों के लिए मजबूत और सुरक्षित शेड बेहद जरूरी हो जाता है। अब किसानों के लिए यह काम और भी आसान हो गया है, क्योंकि बाजार में प्लास्टिक के रेडीमेड दो मंजिला शेड उपलब्ध हैं।
सीआईआरजी मथुरा ने तैयार किया मॉडल
केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा के वैज्ञानिकों ने बकरियों के लिए दो मंजिला मकान का डिजाइन तैयार किया है। इन शेड्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि नीचे बड़ी बकरियों को रखा जा सके और ऊपर बकरी के बच्चों को। यह व्यवस्था खासतौर पर सर्दियों में बेहद उपयोगी है क्योंकि बच्चे मिट्टी के संपर्क से दूर रहते हैं और बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं।
20 साल तक चलने वाला 1.80 लाख का शेड
CIRG के वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, एक बड़ी बकरी को औसतन 1.5 स्क्वायर मीटर जगह की आवश्यकता होती है। उनके द्वारा तैयार किया गया मॉडल मकान 10 मीटर चौड़ा और 15 मीटर लंबा है।
- निचली मंजिल पर 10–12 बड़ी बकरियां रखी जा सकती हैं।
- ऊपरी मंजिल पर 17–18 बकरी के बच्चे आसानी से रह सकते हैं।
- इस शेड को बनाने की लागत लगभग 1.80 लाख रुपये आती है।
- इसमें लोहे की एंगल और प्लास्टिक शीट का इस्तेमाल होता है, जो बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं।
- इस शेड की मजबूती 20 साल तक रहती है।
बच्चों के लिए सुरक्षित, पालन में आसान
ऊपरी मंजिल पर रखे गए बच्चे मिट्टी के संपर्क में नहीं आते हैं, जिससे वे मिट्टी खाने और पेट में कीड़े पड़ने जैसी समस्याओं से बच जाते हैं। आमतौर पर ये बीमारियां पशुपालकों को बड़ी आर्थिक हानि पहुंचाती हैं, लेकिन इस शेड की वजह से उपचार पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है।
छोटे किसानों के लिए वरदान
यह मॉडल शेड खासतौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद है जिनके पास जगह की कमी है। छोटे पैमाने पर बकरी पालन करने वाले किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं और दूध व मीट उत्पादन बढ़ाकर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
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