खेती-किसानी

बरसात में फलदार पौधे लगाने का सही तरीका जानें

Monsoon Plantation

नई दिल्ली: बरसात का मौसम शुरू होते ही खेतों और बागों में हरियाली लौट आती है। यह समय केवल खरीफ फसलों की बुवाई के लिए ही नहीं, बल्कि फलदार पौधों की रोपाई के लिए भी सबसे उपयुक्त माना जाता है। जुलाई और अगस्त के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी होने से पौधों की जड़ें तेजी से विकसित होती हैं और उनके जीवित रहने की संभावना भी बढ़ जाती है। हालांकि, यदि पौधरोपण वैज्ञानिक तरीके से नहीं किया जाए, तो अच्छी गुणवत्ता वाला पौधा भी कुछ ही दिनों में खराब हो सकता है। ऐसे में किसानों के लिए सही विधि अपनाना बेहद जरूरी है।

बरसात में इन फलदार पौधों की करें रोपाई

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार आम, अमरूद, नींबू, आंवला, सहजन, कटहल, पपीता समेत कई फलदार पौधों की रोपाई के लिए जुलाई और अगस्त सबसे उपयुक्त महीने हैं। इस दौरान प्राकृतिक नमी पौधों की जड़ों के विकास में मदद करती है, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और उनकी स्थापना आसानी से हो जाती है।

प्रमाणित पौधों का ही करें चयन

किसी भी बाग की सफलता स्वस्थ पौधों से शुरू होती है। इसलिए पौधे हमेशा प्रमाणित और पंजीकृत पौधशालाओं से ही खरीदें। उद्यान विभाग और वन विभाग की पौधशालाओं से भी उन्नत, स्वस्थ और रोगमुक्त पौधे उचित मूल्य पर प्राप्त किए जा सकते हैं। पौधा खरीदते समय यह अवश्य देखें कि उसकी जड़ें मजबूत हों, तना स्वस्थ हो और उस पर किसी प्रकार के रोग या कीट का प्रकोप न हो।

गड्ढे की तैयारी में न करें लापरवाही

पौधरोपण से पहले गड्ढे की उचित तैयारी करना जरूरी है। गड्ढे से निकाली गई मिट्टी में बराबर मात्रा में बालू और अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। इसके साथ आवश्यकतानुसार फफूंदनाशी दवा मिलाकर गड्ढे को भर दें। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की जड़ों को शुरुआती अवस्था में रोगों से सुरक्षा मिलती है।

सही तरीके से करें पौधरोपण

अच्छी वर्षा होने के बाद पौधरोपण करना सबसे बेहतर माना जाता है। पौधा लगाने से पहले उसकी पॉलिथीन सावधानीपूर्वक हटाएं ताकि जड़ों को नुकसान न पहुंचे। पौधे को गड्ढे के बीच में इस प्रकार रखें कि उसकी जड़ें मिट्टी की सतह से लगभग पाँच से आठ सेंटीमीटर नीचे रहें। इसके बाद मिट्टी भरकर हल्के हाथों से दबाएं। ध्यान रखें कि मिट्टी को अत्यधिक न दबाएं, क्योंकि इससे जड़ों का विकास प्रभावित हो सकता है।

जलभराव से बचाना है सबसे जरूरी

बरसात में अधिक पानी पौधों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यदि लगातार वर्षा हो रही हो तो खेत में पानी निकासी की समुचित व्यवस्था रखें। लंबे समय तक जड़ों के आसपास पानी जमा रहने से जड़ें सड़ सकती हैं और पौधा नष्ट हो सकता है। वहीं, यदि वर्षा न हो तो आवश्यकता अनुसार हल्की सिंचाई अवश्य करें।

निराई-गुड़ाई और मल्चिंग से होगा फायदा

पौधरोपण के बाद नियमित निराई-गुड़ाई करना जरूरी है ताकि खरपतवार पौधों का पोषण न छीन सकें। इसके अलावा पौधों के चारों ओर सूखी घास, पत्तियां या भूसे की परत बिछाकर मल्चिंग करने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं और जड़ों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।

पौधों की नियमित निगरानी करें

पौधरोपण के बाद समय-समय पर पौधों का निरीक्षण करते रहें। यदि किसी पौधे में रोग या कीट के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कृषि या उद्यान विशेषज्ञ की सलाह लेकर उचित प्रबंधन करें। शुरुआती दिनों में सही देखभाल से पौधों का विकास बेहतर होता है और भविष्य में अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है।

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