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पंजाब में गेहूं भंडारण संकट गहराया, खरीद से पहले ही गोदाम फुल

Wheat in Punjab gehun mandi

चंडीगढ़: पंजाब में इस समय अनाज के गोदाम पहले से ही पूरी तरह भरे हुए हैं, जबकि गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने में अभी करीब छह हफ्ते बाकी हैं। ऐसे में राज्य में भंडारण की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अप्रैल के आखिर तक हालात काबू से बाहर हो सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, आने वाले दिनों में मंडियों में करीब 125 लाख टन गेहूं आने की संभावना है, लेकिन इसमें से लगभग 50 लाख टन गेहूं को रखने के लिए फिलहाल जगह उपलब्ध नहीं है। इसका सीधा असर किसानों और प्रशासन दोनों पर पड़ सकता है। पंजाब में गेहूं की बिक्री करने वाले किसान संदेह की स्थिति में हैं।

पंजाब में गेहूं भंडारण की बढ़ती समस्या

एक रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव राहुल तिवारी ने बताया कि अगर मंडियों में बने शेडों को अस्थायी खुले चबूतरे में बदल भी दिया जाए, तो केवल 1.2 से 1.5 लाख टन गेहूं रखने की अतिरिक्त क्षमता ही बन पाएगी। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में गेहूं ऐसा रहेगा, जिसे सही तरीके से रखने की जगह नहीं मिल सकेगी। राहुल तिवारी ने इस स्थिति को लेकर भगवंत मान को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से मदद लेने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि 15 फरवरी से 15 अप्रैल के बीच अनाज की आवाजाही को तेज किया जाए, तभी गोदामों में कुछ जगह बन सकती है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के सामने उठाया मुद्दा

मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही यह समस्या अमित शाह और प्रल्हाद जोशी के सामने रख चुके हैं। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि पंजाब से दूसरे राज्यों में अनाज भेजने की रफ्तार बढ़ाई जाएगी। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। इस समय पंजाब से सिर्फ करीब 5 लाख टन चावल और गेहूं ही बाहर भेजा जा रहा है, जो समस्या की गंभीरता को देखते हुए नाकाफी है।

अतिरिक्त स्टॉक बना बड़ी चुनौती

स्थिति इसलिए और गंभीर हो गई है क्योंकि राज्य में पिछले साल का करीब 50 लाख टन गेहूं पहले से ही जमा है। पंजाब के पास गोदामों, साइलो और खुले चबूतरों में लगभग 75 लाख टन गेहूं रखने की क्षमता है, लेकिन इतना ज्यादा अतिरिक्त स्टॉक इस व्यवस्था पर भारी पड़ रहा है।

फरवरी-मार्च में 25 लाख टन गेहूं बाहर भेजना जरूरी

अधिकारियों के मुताबिक, संकट से बचने के लिए फरवरी और मार्च में पंजाब से कम से कम 25 लाख टन गेहूं बाहर भेजना बेहद जरूरी है। अगर 15 अप्रैल से पहले गोदाम खाली नहीं हुए, तो नई फसल को रखना मुश्किल हो जाएगा। खरीद के समय यदि मंडियों से अनाज उठाने में देरी हुई, तो किसानों में नाराजगी फैल सकती है, क्योंकि वे समय पर खरीद और भुगतान पर निर्भर रहते हैं।

ढुलाई नहीं बढ़ी तो बढ़ेंगी मुश्किलें

पंजाब में अनाज खरीद में देरी अक्सर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाता है। इससे न केवल किसान परेशान होते हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है। अधिकारियों का कहना है कि समय तेजी से निकल रहा है। यदि अगले कुछ हफ्तों में अनाज की ढुलाई नहीं बढ़ाई गई, तो गेहूं खरीद शुरू होते ही राज्य को गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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