खेती-किसानी

गेहूं की खेती में सिंचाई प्रबंधन: सही समय पर पानी देगा बंपर पैदावार

Wheat cultivation

नई दिल्ली: भारत में गेहूं एक प्रमुख रबी फसल है, जिसकी पैदावार और गुणवत्ता काफी हद तक सही सिंचाई प्रबंधन पर निर्भर करती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर गेहूं की फसल को उसके महत्वपूर्ण विकास चरणों पर पर्याप्त पानी नहीं मिलता है, तो दानों का आकार, वजन और कुल उत्पादन प्रभावित होता है। गेहूं की खेती के दौरान पूरी फसल अवधि में लगभग 35 से 40 सेंटीमीटर पानी की जरूरत होती है। खासतौर पर बालियां निकलने और जड़ों के विकास के समय पानी की कमी फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।

गेहूं की फसल में सिंचाई के सबसे महत्वपूर्ण चरण

क्राउन रूट इनिशिएशन (CRI) चरण

CRI अवस्था बुवाई के 20 से 25 दिन बाद आती है और इसे गेहूं की सबसे संवेदनशील अवस्था माना जाता है। इस दौरान पौधों की जड़ों का विकास होता है। अगर इस समय पानी की कमी हो जाए, तो पौधे कमजोर रह जाते हैं और आगे चलकर पैदावार घट जाती है। इस चरण में गेहूं को करीब 60 से 70 मिलीमीटर पानी की आवश्यकता होती है।

टिलरिंग अवस्था

बुवाई के 40 से 45 दिन बाद टिलरिंग अवस्था आती है, जब पौधों से नई शाखाएं निकलती हैं। सही समय पर सिंचाई करने से अधिक टिलर बनते हैं, जिससे बालियों की संख्या बढ़ती है और उपज में सीधा फायदा होता है।

जॉइंटिंग अवस्था

यह अवस्था बुवाई के 60 से 65 दिन बाद आती है। इस दौरान पौधे का तना तेजी से बढ़ता है और बालियों का निर्माण शुरू होता है। पर्याप्त नमी मिलने से पौधे पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण करते हैं, जिससे फसल मजबूत बनती है।

फूल आने की अवस्था

बुवाई के लगभग 85 से 90 दिन बाद गेहूं में फूल आते हैं। यह दाना बनने की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण चरण है। इस समय पानी की कमी होने पर परागण प्रभावित होता है, जिससे दानों की संख्या घट सकती है।

मिल्क अवस्था

बुवाई के 100 से 105 दिन बाद गेहूं के दानों में भराव शुरू होता है। इस चरण में सिंचाई करने से दानों का आकार और वजन बेहतर होता है, जिससे किसानों को अच्छी गुणवत्ता की फसल मिलती है।

मिट्टी के प्रकार के अनुसार गेहूं की सिंचाई

रेतीली मिट्टी

रेतीली मिट्टी में पानी जल्दी सूख जाता है, इसलिए इसमें 7 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना जरूरी होता है।

दोमट मिट्टी

दोमट मिट्टी में नमी कुछ समय तक बनी रहती है। ऐसी मिट्टी में 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई उपयुक्त मानी जाती है।

चिकनी मिट्टी

चिकनी मिट्टी में नमी लंबे समय तक रहती है, इसलिए इसमें 15 से 20 दिन में एक बार सिंचाई करना पर्याप्त होता है।

गेहूं में कितनी बार करनी चाहिए सिंचाई

बारानी गेहूं की खेती में आमतौर पर CRI, फूल और मिल्क अवस्था पर 2 से 3 सिंचाई पर्याप्त मानी जाती है। वहीं, सिंचित गेहूं में सभी महत्वपूर्ण चरणों को ध्यान में रखते हुए 5 से 6 सिंचाई की जरूरत पड़ती है। हर सिंचाई में इतना पानी देना चाहिए कि नमी लगभग 30 सेंटीमीटर गहराई तक पहुंच सके।

सही सिंचाई से क्या होंगे फायदे

अगर किसान गेहूं की फसल में सही समय और सही मात्रा में सिंचाई करते हैं, तो फसल की बढ़वार बेहतर होती है और पौधे मजबूत बनते हैं। इससे पोषक तत्वों का अधिकतम उपयोग होता है और दानों की गुणवत्ता व वजन में सुधार आता है। साथ ही पानी की बचत होती है, उत्पादन लागत कम होती है और सूखे या जल-तनाव से होने वाले नुकसान से भी बचाव किया जा सकता है।

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