मंडी भाव

प्याज की कीमतों में गिरावट, उपभोक्ताओं को जल्द मिल सकती है राहत

Drop in onion prices

नई दिल्ली: प्याज की कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं के लिए राहत की उम्मीद जगी है। उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने कहा है कि पिछले नौ दिनों में मंडियों में प्याज के थोक भाव में करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। थोक बाजार में आई इस नरमी का असर आने वाले दिनों में खुदरा बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 53.92 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। यह कीमत एक महीने पहले की तुलना में 48 प्रतिशत और पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 94 प्रतिशत अधिक है। ऐसे में थोक कीमतों में हालिया गिरावट को उपभोक्ताओं के लिए राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

देश में प्याज की कमी नहीं

उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे ने उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई के एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत में प्याज की कीमतों और उपलब्धता को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश में प्याज की कोई कमी नहीं है और सरकार लगातार यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि उपभोक्ताओं को प्याज उचित कीमत पर उपलब्ध हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि थोक बाजार में कीमतों में आई कमी का सकारात्मक असर खुदरा बाजार पर भी पड़ेगा और आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को कम कीमत पर प्याज मिल सकता है।

35 रुपये किलो की दर से सरकारी बिक्री

प्याज की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने पिछले महीने 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज की बिक्री शुरू की थी। बाजार भाव की तुलना में कम कीमत पर यह प्याज राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ और केंद्रीय भंडार के खुदरा केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा मोबाइल वाहनों के माध्यम से भी उपभोक्ताओं तक प्याज पहुंचाया जा रहा है। सरकारी बिक्री व्यवस्था के जरिए अब तक देश के करीब 48 शहरों में प्याज उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके लिए सड़क परिवहन के साथ-साथ अन्य परिवहन माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

बफर भंडार से बाजार में पहुंचाया जा रहा प्याज

सरकार ने मौसमी तेजी के दौरान प्याज की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बफर भंडार से चरणबद्ध तरीके से प्याज बाजार में उतारना शुरू किया है। इसके लिए रेलवे और सड़क परिवहन दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

‘कांदा एक्सप्रेस’ से हो रही आपूर्ति

रेलवे के जरिए प्याज की ढुलाई के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, जिसे ‘कांदा एक्सप्रेस’ नाम दिया गया है। मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत रखे गए प्याज की बिक्री 24 अगस्त से नाफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से शुरू की गई थी। सरकार का कहना है कि बफर भंडार से प्याज की आपूर्ति बढ़ाने से बाजार में उपलब्धता बेहतर हुई है और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिली है।

सरकार के पास 1.21 लाख टन प्याज का भंडार

केंद्र सरकार ने चालू वर्ष के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर भंडार रखा है। इस भंडार का इस्तेमाल बाजार में जरूरत के अनुसार प्याज की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में देश में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है। वर्ष 2024-25 में यह उत्पादन 307.67 लाख टन था। इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में उत्पादन में करीब 0.30 लाख टन की मामूली कमी का अनुमान है।

अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ती हैं प्याज की कीमतें?

प्याज की कीमतों में अगस्त और सितंबर के दौरान अक्सर मौसमी तेजी देखने को मिलती है। इस अवधि में त्योहारों के कारण मांग बढ़ने, मौसम में बदलाव, बारिश से आपूर्ति प्रभावित होने और परिवहन व्यवस्था में बदलाव जैसे कई कारण कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, पिछले नौ दिनों में थोक बाजार में प्याज के भाव में आई 9 प्रतिशत की गिरावट से आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों के नरम पड़ने की उम्मीद बढ़ी है। यदि थोक बाजार की यह गिरावट बनी रहती है, तो इसका लाभ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है।

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