नई दिल्ली: गर्मी का मौसम शुरू होते ही किसानों के लिए खरबूजे की खेती कम समय में अच्छी कमाई का एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आ रही है। जायद मौसम में उगाई जाने वाली यह फसल गर्मियों में बाजार में अधिक मांग के कारण किसानों को अच्छा लाभ दिला सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान सही किस्म का चयन करें और समय पर बुवाई करें तो खरबूजे की खेती से कम समय में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसी कारण देश के कई हिस्सों में किसान धान और गेहूं के साथ-साथ सब्जियों और फलों की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्मियों में मई और जून के महीनों में खरबूजे की मांग बाजारों में काफी बढ़ जाती है। ऐसे में यदि किसान अभी से इसकी खेती शुरू कर दें तो उन्हें अच्छा बाजार मूल्य मिल सकता है। अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्म के बीज का चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। काशी मधु एक ऐसी ही किस्म है, जो किसानों को बढ़िया पैदावार देती है। खरबूजे की यह किस्म सामान्य क़िस्मों के मुक़ाबले कई गुना अधिक मुनाफा देती है।
काशी मधु किस्म की खासियत
काशी मधु किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस किस्म के फल लंबे गोलाकार आकार के होते हैं। इसका छिलका भूरा-पीला रंग का होता है, जबकि अंदर का गूदा ठोस, रसदार और गहरे नारंगी रंग का होता है। स्वाद और गुणवत्ता के कारण यह किस्म बाजार में अच्छी मांग प्राप्त करती है। उत्पादन की दृष्टि से भी यह किस्म किसानों के लिए लाभदायक मानी जाती है। इसकी खेती से किसान लगभग 25 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं। इसके फल लगभग 5 से 10 दिनों तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं। यह किस्म लगभग 90 से 100 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम समय में अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं।
बीज की उपलब्धता और कीमत
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय बीज निगम द्वारा काशी मधु किस्म के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसान इस किस्म के बीज को घर बैठे मंगवा सकते हैं। वर्तमान में पांच ग्राम बीज का पैकेट रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी इसे खरीदना आसान हो गया है। यह बीज लगभग 35 रुपये की कीमत पर उपलब्ध बताया जा रहा है।
खरबूजे की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी
खरबूजे की खेती कई प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तैयारी करना जरूरी होता है। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए, जबकि उसके बाद दो से तीन जुताई कल्टीवेटर से की जानी चाहिए।
हर जुताई के बाद खेत में पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरी बनाना जरूरी होता है। अंतिम जुताई के समय खेत में लगभग 200 से 250 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला देना चाहिए। इसके बाद खेत तैयार होने पर बीज की बुवाई की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही तरीके से खेती करने पर किसान खरबूजे की फसल से अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
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