नई दिल्ली: भारत सरकार ने कहा है कि अमेरिका के साथ हाल ही में घोषित व्यापार समझौता भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए नए अवसर लेकर आएगा। इस समझौते के जरिए किसानों और मछुआरों को उन क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने का मौका मिलेगा, जहां भारत पहले से मजबूत स्थिति में है।
निर्यात बढ़ाने के नए अवसर
सरकार के अनुसार समुद्री उत्पाद, बासमती चावल, मसाले, चाय, कॉफी, तिलहन और कुछ फलों के निर्यात में वृद्धि की संभावना है। इसके साथ ही वन आधारित उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को भी बड़े बाजार में प्राथमिकता मिलेगी, जिससे किसानों की आय बढ़ सकती है।
बड़े बाजार में मिलेगी पहुंच
इस समझौते के तहत भारतीय उत्पादों को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे। शुल्क रियायतों से किसानों को अपने उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर बेचने में मदद मिलेगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रमुख कृषि उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, ताकि घरेलू किसानों को नुकसान न हो।
संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा
समझौते में चावल, गेहूं, डेयरी, मक्का, बाजरा, मूंगफली और अन्य प्रमुख उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है। इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि देश के किसानों के हित सुरक्षित रहें और घरेलू बाजार प्रभावित न हो।
सीमित रियायत और संतुलन
कुछ उत्पादों जैसे सेब, अखरोट और तेल से जुड़े उत्पादों पर सीमित और कोटा आधारित रियायत दी गई है। इसका उद्देश्य घरेलू मांग को पूरा करना है, बिना किसानों को नुकसान पहुंचाए। इसी तरह पशु आहार और कपास जैसे क्षेत्रों में भी संतुलित नीति अपनाई गई है।
किसानों को मिला संस्थागत ऋण
सरकार ने किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराई है। वर्ष दो हजार तेइस-चौबीस में करोड़ों किसानों को संस्थागत ऋण दिया गया, जिसमें छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी हिस्सेदारी मिली है।
किसान पहचान और डिजिटल सुविधा
किसानों को डिजिटल पहचान देने के लिए किसान पहचान योजना के तहत करोड़ों किसानों को जोड़ा गया है। इसमें भूमिधारी किसानों के साथ-साथ बटाईदार और किराएदार किसानों को भी शामिल किया जा रहा है, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे उन तक पहुंच सके।
दूध और खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी
देश में दूध और खाद्यान्न उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। हाल के वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जो देश की कृषि क्षमता को दर्शाता है। आने वाले वर्षों में भी उत्पादन बढ़ने की संभावना जताई गई है। कुल मिलाकर यह व्यापार समझौता किसानों के लिए नए अवसर खोलने के साथ-साथ घरेलू हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिससे कृषि क्षेत्र को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया जा सके।
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