नई दिल्ली: देश के ज्यादातर हिस्सों में मॉनसून की बारिश सक्रिय हो चुकी है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई रफ्तार पकड़ रही है। गन्ना किसानों के लिए यह मौसम लाभकारी जरूर है, लेकिन साथ ही एक गंभीर खतरा भी लेकर आता है – गुलाबी मिलीबग (Pink Mealybug) और कॉटन मिलीबग (Cotton Mealybug) का बढ़ता प्रकोप।
गन्ने की फसल पर बढ़ा मिलीबग का हमला
गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए यह वक्त सतर्क रहने का है, क्योंकि लगातार बारिश और नमी भरे मौसम में मिलीबग जैसे कीट तेजी से पनपते हैं। इन कीटों का वैज्ञानिक नाम Maconellicoccus hirsutus (गुलाबी मिलीबग) और Phenacoccus solenopsis (कॉटन मिलीबग) है। ये कीट गन्ने के पौधों को कई तरीकों से गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।
गन्ने को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं मिलीबग
रस चूसना: मिलीबग पौधों की कोमल पत्तियों, तनों और गांठों से रस चूसते हैं, जिससे पौधा कमजोर पड़ जाता है और उसका विकास रुक जाता है। यह फ़ोटोसिंथेसिस प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है, जिससे गन्ने की वृद्धि और उसमें चीनी की मात्रा घट जाती है।
हनीड्यू और कालिख फफूंदी: मिलीबग के मुंह से निकलने वाला चिपचिपा पदार्थ (हनीड्यू) पत्तियों पर कालिख जैसी फंगस को बढ़ावा देता है, जिसे ‘सूट्टी मोल्ड’ कहा जाता है। इससे पत्तियां काली पड़ जाती हैं और प्रकाश संश्लेषण बाधित होता है।
पौधे की बनावट पर असर: गुलाबी मिलीबग पौधों की गांठों और पत्तियों को सिकोड़ देता है, जबकि कॉटन मिलीबग सफेद मोम जैसी परत बनाकर पौधों की श्वसन क्रिया में रुकावट डालता है।
उपज में भारी गिरावट: यदि समय रहते इन पर नियंत्रण न पाया जाए, तो गन्ने की उपज में 20 से 50 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इससे न केवल उत्पादन घटता है, बल्कि गुणवत्ता और चीनी की मात्रा भी प्रभावित होती है, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कैसे करें मिलीबग पर समय रहते नियंत्रण
साफ-सफाई और खेत प्रबंधन: खेत में खरपतवारों की सफाई करें और प्रभावित पौधों के हिस्सों को काटकर नष्ट करें। जल निकासी की अच्छी व्यवस्था और उचित पौधों की दूरी बनाए रखें।
बीज उपचार: बुवाई से पहले बीज को कीटमुक्त करना जरूरी है। स्वयं-छीलने वाली किस्में (self stripping varieties) भी कीटों से कम प्रभावित होती हैं।
जैविक नियंत्रण के उपाय
प्राकृतिक दुश्मनों का प्रयोग: Cryptolaemus montrouzieri (लेडी बर्ड बीटल) और Aenasius bambawalei जैसे कीट प्राकृतिक रूप से मिलीबग को खत्म करते हैं।
नीम आधारित कीटनाशक: नीम तेल (0.5-1%) का छिड़काव कीट नियंत्रण में कारगर होता है।
रासायनिक नियंत्रण के उपाय
इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL – 0.3 से 0.5 मि.ली./लीटर पानी
थायमेथोक्साम 25 WG – 0.2 ग्राम/लीटर पानी
क्लोरोपायरीफॉस 20 EC – 2 मि.ली./लीटर पानी (सावधानी से प्रयोग करें)
हॉर्टिकल्चरल ऑयल/साबुन घोल: 3 चम्मच कुकिंग ऑयल + ½ चम्मच डिटर्जेंट 4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें।
स्पिनोसैड और सिंथेटिक पाइरेथ्रॉइड्स – जैविक और रासायनिक दोनों विकल्पों में प्रभावी।
निगरानी और जागरुकता जरूरी
गन्ने के खेतों की नियमित निगरानी करें। पत्तियों पर सफेद मोम, चिपचिपा पदार्थ या काले धब्बे दिखें तो तुरंत कीटनाशकों का उपयोग करें। स्थानीय कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों से सलाह लेकर उचित कदम उठाएं। स्टिकी ट्रैप्स लगाकर कीटों की निगरानी भी करें। मॉनसून भले ही गन्ने की खेती के लिए लाभदायक हो, लेकिन इसमें छिपे खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मिलीबग जैसे कीटों पर समय रहते नियंत्रण ही किसानों को नुकसान से बचा सकता है। अतः सतर्क रहें, समय पर निरीक्षण करें और उचित उपाय अपनाकर अपनी फसल को सुरक्षित रखें।
