कृषि समाचार

20 जुलाई के बाद बारिश से खरीफ बुवाई में आएगी तेजी: शिवराज सिंह चौहान

Shivraj Singh Chouhan Kharif Sowing

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में जून महीने के दौरान कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार धीमी रही है। हालांकि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा होने से बुवाई में तेजी आएगी और मौजूदा कमी की काफी हद तक भरपाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि खरीफ फसलों की बुवाई 15 अगस्त तक जारी रहती है, इसलिए किसानों के पास अभी भी पर्याप्त समय उपलब्ध है। केंद्र सरकार लगातार वर्षा की स्थिति और बुवाई की प्रगति पर नजर बनाए हुए है।

20 जुलाई के बाद अच्छी वर्षा की संभावना

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जून में सामान्य से कम वर्षा हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में कई क्षेत्रों में अच्छी वर्षा दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई के बाद भी अच्छी वर्षा होने की संभावना है। यदि मौसम अनुकूल रहता है तो किसानों को बुवाई पूरी करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा और वर्तमान में जो कमी दिखाई दे रही है, उसमें काफी सुधार हो सकता है।

किसानों को समय पर मिलेंगे बीज और खाद

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही है। किसानों को समय पर बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वर्षा शुरू होते ही बुवाई कार्य में तेजी लाई जा सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों को कृषि कार्य के लिए आवश्यक संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

अब तक खरीफ बुवाई 16 प्रतिशत पीछे

कृषि मंत्रालय के 10 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष खरीफ फसलों की कुल बुवाई 531.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत कम है। कमजोर मानसून और अल नीनो के प्रभाव के कारण कई राज्यों में बुवाई समय पर शुरू नहीं हो सकी, जिससे अधिकांश प्रमुख फसलों का रकबा प्रभावित हुआ है।

धान, दलहन, तिलहन और कपास की बुवाई घटी

आंकड़ों के अनुसार धान की बुवाई इस वर्ष 114.69 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 125.53 लाख हेक्टेयर थी। दलहन फसलों का रकबा घटकर 56.63 लाख हेक्टेयर रह गया है। अरहर, उड़द और मूंग जैसी प्रमुख दलहन फसलों की बुवाई भी पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज की गई है। इसी तरह मोटे अनाज का रकबा 98.69 लाख हेक्टेयर और तिलहन फसलों का रकबा 117.83 लाख हेक्टेयर रहा है। सोयाबीन की बुवाई में भी गिरावट दर्ज की गई है और इसका रकबा लगभग 16 प्रतिशत घटकर 90.51 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है।

गन्ने की बुवाई बढ़ी, कपास अब भी पिछड़ी

जहां अधिकांश खरीफ फसलों की बुवाई में कमी देखने को मिली है, वहीं गन्ने की खेती में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वर्ष गन्ने का रकबा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया है। जूट और मेस्ता की बुवाई में भी पिछले वर्ष की तुलना में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। दूसरी ओर कपास की बुवाई अभी भी पिछड़ी हुई है। इस खरीफ मौसम में अब तक 79.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 93.95 लाख हेक्टेयर था। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में अच्छी वर्षा होती है तो खरीफ बुवाई में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।

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