लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए धान खरीद की नई नीति को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में किसानों से 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। पिछले वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड 62 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई थी। इस बार सरकार ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी की है। किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश भर में आठ प्रमुख सरकारी क्रय संस्थाओं के माध्यम से 4,500 खरीद केंद्र संचालित किए जाएंगे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर से शुरू होगी खरीद
धान की फसल पकने के समय और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में सरकारी खरीद दो चरणों में की जाएगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान की खरीद 15 अक्टूबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक चलेगी, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक जारी रहेगी। संबंधित जिलों के जिलाधिकारी स्थानीय उत्पादन और मंडियों में धान की आवक के आधार पर खरीद संस्थाओं को केंद्र आवंटित करेंगे। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा मिलने और खरीद व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये
केंद्र सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि के बाद उत्तर प्रदेश में सामान्य धान का मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का मूल्य 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य उपलब्ध कराना और सरकारी खरीद के माध्यम से बाजार में मूल्य संबंधी अनिश्चितता को कम करना है। निर्धारित दरों पर खरीद होने से किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए स्पष्ट मूल्य का आधार मिलेगा।
किसान पहचान पत्र से आसान होगी धान की सरकारी खरीद
सरकार ने धान खरीद की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किसान पहचान पत्र की व्यवस्था को महत्व दिया है। केंद्र सरकार की कृषि डिजिटल व्यवस्था के अंतर्गत जिन किसानों का किसान पहचान पत्र बन चुका है, उन्हें विभागीय पोर्टल पर अलग से ऑनलाइन पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। किसान की पहचान के आधार पर खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी और उसकी उपज की तुलाई की जाएगी। इस कदम से पंजीकरण संबंधी औपचारिकताएं कम होने तथा खरीद केंद्रों पर किसानों का समय बचने की उम्मीद है।
48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खाते में पहुंचेगा भुगतान
धान खरीद के बाद सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने पर किसानों को भुगतान सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा। सरकार ने भुगतान 48 घंटे के भीतर करने का प्रावधान किया है और अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। खरीद और ढुलाई में गड़बड़ी रोकने के लिए धान ले जाने वाले वाहनों में स्थान निर्धारण प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, चुनिंदा जिलों में चावल की बोरियों पर क्यूआर संकेतक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे उनकी आवाजाही का पता लगाया जा सकेगा।
खरीद व्यवस्था के लिए 12.25 लाख बोरों की तैयारी
सरकार ने धान खरीद के दौरान पैकिंग से जुड़ी समस्याओं को रोकने के लिए कुल 12.25 लाख बोरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पर्याप्त संख्या में खरीद केंद्र, निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य, किसान पहचान पत्र के आधार पर सरल प्रक्रिया और समयबद्ध भुगतान जैसी व्यवस्थाओं के जरिए सरकार खरीद अभियान को अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी में है। इस बार 65 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य पूरा करना सरकारी एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसकी सफलता केंद्रों के संचालन, धान की समय पर तुलाई, भुगतान की गति और निगरानी व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
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