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शीतलहर और पाले से बढ़ी किसानों की चिंता, रबी की कई फसलें खतरे में

cold wave and frost

नई दिल्ली: उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में शीतलहर और तापमान में तेज गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जहां गेहूं जैसी कुछ रबी फसलों के लिए ठंड और कोहरा फायदेमंद माने जाते हैं, वहीं कई फसलें ऐसी हैं जिनके लिए अत्यधिक ठंड और पाला गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। रबी सीजन के बीच कई राज्यों में रात का तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है और लगातार कोहरे के कारण पाले की स्थिति बन रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा ठंड और पाला फसलों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं।

अत्यधिक ठंड के प्रति संवेदनशील होती हैं कुछ फसलें

लगातार कोहरा और तापमान में गिरावट से कई फसलों की बढ़वार रुक जाती है। खासतौर पर रबी सीजन की कुछ प्रमुख फसलें ठंड के प्रति बेहद संवेदनशील मानी जाती हैं। बहुत ज्यादा ठंड इनके फूल, फल और दानों के विकास को प्रभावित करती है, जिससे सीधा असर पैदावार पर पड़ता है। ऐसे में किसानों के लिए इन फसलों पर विशेष निगरानी रखना जरूरी हो गया है।

आलू की फसल पर पाले का खतरा

आलू की खेती ठंडे मौसम में होती है, लेकिन अत्यधिक ठंड इसके लिए नुकसानदायक साबित होती है। जब तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है, तो आलू के पौधों की पत्तियां झुलसने लगती हैं। कंदों के अंदर मौजूद स्टार्च प्रभावित होता है, जिससे आलू का रंग काला पड़ सकता है। पाले की मार से आलू की गुणवत्ता खराब होती है और किसानों को बाजार में कम दाम मिलते हैं।

शीतलहर से सरसों के फूल और फलियां झड़ने का खतरा

सरसों की फसल के लिए हल्की ठंड अनुकूल मानी जाती है, लेकिन अत्यधिक ठंड और शीतलहर इसके लिए नुकसानदायक हो सकता है। ज्यादा ठंड के कारण फूल और फलियां झड़ने लगती हैं, जिससे दानों की संख्या कम हो जाती है। इसका सीधा असर तेल उत्पादन पर पड़ता है। कई मामलों में पाले की वजह से सरसों की उपज 20 से 30 प्रतिशत तक घट सकती है।

चना की फसल पर ठंड का सीधा असर

चना की फसल अत्यधिक ठंड के प्रति काफी संवेदनशील होती है। तापमान गिरने से पौधों की वृद्धि रुक जाती है और दानों का आकार छोटा रह जाता है। पाले की स्थिति में चने की पत्तियां जल जाती हैं और पौधा कमजोर हो जाता है। इससे पैदावार घटती है और किसानों को बाजार में अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाती।

मटर की गुणवत्ता पर पड़ता है असर

मटर की फसल को ठंड की जरूरत होती है, लेकिन जब तापमान बहुत ज्यादा गिर जाता है तो नुकसान होने लगता है। अत्यधिक ठंड में मटर के फूल झड़ जाते हैं और फलियों का विकास रुक जाता है। दाने सिकुड़ने लगते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता खराब होती है और किसानों का मुनाफा घट जाता है।

सब्जी फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान

टमाटर, बैंगन और मिर्च जैसी सब्जियां ठंड और पाले को बिल्कुल सहन नहीं कर पातीं। ज्यादा ठंड से पौधों की कोशिकाएं फटने लगती हैं, पत्तियां मुरझा जाती हैं और फल सड़ने लगते हैं। पाले की मार से पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा रहता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ठंड और पाले से बचाव के उपाय

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, ठंड और पाले से बचाव के लिए समय रहते उपाय करना बेहद जरूरी है। हल्की सिंचाई करने से खेतों में नमी बनी रहती है, जो पाले के प्रभाव को कम करती है। रात के समय खेतों में धुआं करना, फसलों पर सूखी घास या मल्च बिछाना और पॉलीथिन शीट या लो-टनल का उपयोग भी कारगर उपाय माने जाते हैं। इसके साथ ही मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखकर समय पर कदम उठाने से फसलों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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