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उत्तराखंड में गन्ने की कीमत, लेकिन नई कीमत पर सियासत तेज

sugarcane price in uttarakhand

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने 2025-26 पेराई सत्र के लिए गन्ने के दाम में बढ़ोतरी का ऐलान किया है, लेकिन विपक्ष इसे किसानों के साथ अन्याय बता रहा है। धामी सरकार ने स्टेट एडवाइज्ड प्राइस (SAP) में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है, जिसके बाद यह कीमत 405 रुपये हो गई है। कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने उत्तराखंड में गन्ने की कीमत को “बहुत कम” बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।

कांग्रेस ने कहा – केवल 30 रुपये बढ़ाना किसानों के साथ अन्याय

कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने कहा कि किसानों की वास्तविक लागत और खेती में बढ़ते निवेश को देखते हुए यह बढ़ोतरी बेहद कम है। उन्होंने बताया कि किसानों की मांग थी कि गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए, लेकिन सरकार ने केवल 30 रुपये की बढ़ोतरी कर किसानों की उम्मीदों को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को उठाया था और चेतावनी दी थी कि यदि सरकार जल्द निर्णय नहीं लेती, तो वे किसान सम्मान यात्रा निकालेंगी। अब कांग्रेस इस मुद्दे पर किसानों से चर्चा करने की तैयारी में है।

धामी सरकार ने कहा – किसानों और मिलों से बातचीत के बाद फैसला

राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न स्टेकहोल्डर्स— चीनी मिलों, गन्ना विकास विभाग, किसान संगठनों और अन्य संस्थाओं से बातचीत के बाद यह निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के FRP, उत्तर प्रदेश की गन्ना नीति और उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर एक संतुलित फैसला लिया गया है।

पिछली और नई कीमत में कितना फर्क?

पिछले पेराई सत्र 2024-25 में अगेती किस्म के गन्ने का दाम 375 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का दाम 365 रुपये प्रति क्विंटल था। नए निर्णय के तहत 2025-26 पेराई सीजन के लिए अगेती किस्म की कीमत 405 रुपये और सामान्य किस्म की कीमत 395 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों को राहत मिलेगी और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

सरकार का दावा – गन्ना उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह बढ़ी हुई कीमत न केवल किसानों को वित्तीय राहत देगी, बल्कि गन्ने की खेती को बढ़ावा देने में भी मदद करेगी। उनका कहना है कि इससे राज्य के कृषि क्षेत्र की आय बढ़ेगी और चीनी उद्योग को स्थिरता मिलेगी।

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