मुंबई: चीनी की बढ़ती खुदरा कीमतों पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार गन्ने की पेराई का मौसम सामान्य समय से 15 दिन पहले शुरू करने पर विचार कर सकती है। राज्य में आमतौर पर 1 नवंबर से गन्ने की पेराई शुरू होती है, लेकिन इस बार चीनी की आपूर्ति बढ़ाने और आगामी त्योहारों के दौरान कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 15 अक्टूबर से मिलें शुरू करने का निर्देश दिया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, अगर गन्ने की पेराई 15 दिन पहले शुरू होती है तो बाजार में नई चीनी की खेप जल्दी पहुंच सकती है। इससे आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने और त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत सस्ती चीनी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। केंद्र सरकार की ओर से आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद खुदरा बाजार में चीनी के दाम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं।
15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी
महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई सामान्य तौर पर 1 नवंबर से शुरू होती है। लेकिन इस बार चीनी की उपलब्धता और बाजार में कीमतों को देखते हुए राज्य सरकार पेराई सत्र को 15 दिन पहले शुरू करने का फैसला कर सकती है। समय से पहले पेराई शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मिलों से तैयार होने वाली नई चीनी बाजार में जल्दी पहुंच सकेगी। इससे मौजूदा भंडार पर दबाव कम करने और त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग को पूरा करने में सहायता मिल सकती है। राज्य के अधिकारियों का मानना है कि इस बार शुरुआती भंडार अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है। ऐसे में गन्ने की पेराई जल्दी शुरू करना बाजार में चीनी की लगातार आपूर्ति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
मिलों से मांगे गए पेराई लाइसेंस के आवेदन
महाराष्ट्र के चीनी आयुक्तालय ने मिलों से पेराई लाइसेंस के लिए आवेदन मांगे हैं। मिल संचालकों को सितंबर के अंत तक लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही मिलों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि नया लाइसेंस लेने से पहले किसानों को उनके गन्ने का पूरा भुगतान किया जाए। इससे किसानों के बकाया भुगतान की स्थिति को बेहतर करने के साथ आगामी पेराई सत्र की तैयारियों को भी समय पर पूरा किया जा सकेगा।
महाराष्ट्र में 15.4 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती
शुरुआती अनुमानों के अनुसार महाराष्ट्र में करीब 15.4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हुई है। यही गन्ना आगामी पेराई सत्र में चीनी मिलों के लिए उपलब्ध हो सकता है। हालांकि केवल गन्ने के रकबे के आधार पर चीनी के कुल उत्पादन का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। गन्ने की वास्तविक उपलब्धता, प्रति हेक्टेयर उत्पादन और गन्ने से निकलने वाली चीनी की मात्रा पर अंतिम उत्पादन निर्भर करेगा। सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध कराना है। इसलिए समय से पहले पेराई शुरू करने के प्रस्ताव को आपूर्ति बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
खुदरा बाजार में करीब 55 रुपये किलो है चीनी
फिलहाल चीनी की खुदरा कीमत करीब 55 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बताई जा रही है। महीने की शुरुआत में कीमतों में तेजी आने से पहले की तुलना में यह स्तर करीब 10 रुपये अधिक है। केंद्र सरकार पहले ही बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दे चुकी है। इसके बावजूद बाजार में कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आपूर्ति और मांग के बीच अंतर कम होने पर ही खुदरा कीमतों में उल्लेखनीय राहत मिलने की संभावना है। आने वाले त्योहारों में चीनी की खपत बढ़ने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
त्योहारों के दौरान बढ़ेगी चीनी की मांग
देश में आगामी त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद है। गणेशोत्सव के बाद 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्र के दौरान विशेष रूप से पूर्वी राज्यों से चीनी की मांग में तेजी आ सकती है। इसके बाद दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार भी आने वाले हैं। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की खपत बढ़ने के कारण बाजार में अतिरिक्त मांग पैदा होती है। जानकारों का मानना है कि यदि इस अवधि से पहले नई चीनी बाजार में पहुंचने लगे तो आपूर्ति का दबाव कम किया जा सकता है। इसी वजह से गन्ने की पेराई जल्दी शुरू करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
पिछले सत्र में भी सामने आई थी आपूर्ति की चुनौती
पिछले पेराई सत्र में भी चीनी की आपूर्ति से जुड़ी चुनौती सामने आई थी। उस समय करीब 16.4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ना उपलब्ध था, लेकिन पेराई का काम केवल 104 दिन तक चला था। पिछले सत्र में लगभग 99 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस बार सरकार के सामने बाजार की मांग को देखते हुए उत्पादन और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
बारिश की कमी से चीनी की रिकवरी पर असर की आशंका
चीनी मामलों के जानकार विजय औटाडे ने कहा है कि केवल गन्ने के रकबे से चीनी उत्पादन का सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता। वास्तविक स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि कितना गन्ना मिलों तक पहुंचता है, प्रति हेक्टेयर गन्ने का उत्पादन कितना रहता है और उससे कितनी मात्रा में चीनी निकलती है। उनके मुताबिक सोलापुर और मराठवाड़ा के कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण गन्ने से चीनी निकलने की दर प्रभावित हो सकती है। इन क्षेत्रों से महाराष्ट्र के कुल चीनी उत्पादन का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा आता है। ऐसे में यदि बारिश की कमी का असर गन्ने की गुणवत्ता पर पड़ता है तो गन्ने की मात्रा पर्याप्त होने के बावजूद चीनी उत्पादन उम्मीद से कम रह सकता है।
देर से बोई गई फसल भी बन सकती है चुनौती
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कई किसानों ने पिछले साल गन्ने की बुवाई देर से की थी। ऐसे में नवंबर तक कुछ फसल पूरी तरह पक नहीं पाएगी। इससे गन्ने से बेहतर मात्रा में चीनी निकलने की संभावना प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा गन्ने का एक हिस्सा गुड़ बनाने और नई फसल की बुवाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे चीनी मिलों में पेराई के लिए उपलब्ध गन्ने की कुल मात्रा कम हो सकती है। इस स्थिति को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार के लिए समय से पहले पेराई शुरू करने का फैसला बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मददगार हो सकता है, लेकिन अंतिम परिणाम गन्ने की वास्तविक उपलब्धता, गुणवत्ता और चीनी की रिकवरी पर निर्भर करेगा।
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