नई दिल्ली: कृषि विशेषज्ञों ने धान किसानों को आने वाले सप्ताहों में फसल की नियमित निगरानी करने और कीटों की समय रहते पहचान कर नियंत्रण करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार इस समय धान की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। खेत में कीटों की शुरुआती मौजूदगी का पता लगाकर उचित उपाय करने से फसल को होने वाले बड़े नुकसान को रोका जा सकता है। साथ ही, बिना जरूरत कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचकर किसान खेती की लागत को भी कम कर सकते हैं।
धान की फसल में नियमित निगरानी जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक किसानों को अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए और धान के पौधों की स्थिति पर लगातार नजर रखनी चाहिए। खासतौर पर पत्तियों, पौधों और नई कोंपलों में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखाई देने पर उसकी तुरंत जांच करनी चाहिए। कीटों के शुरुआती प्रकोप को नजरअंदाज करने से उनकी संख्या तेजी से बढ़ सकती है और कुछ ही समय में बड़े क्षेत्र में फसल प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसान खेत में चलते हुए अलग-अलग हिस्सों के पौधों की अच्छी तरह जांच करें और जहां समस्या दिखाई दे, वहां विशेष ध्यान दें।
प्रभावित पौधों को खेत से निकालकर नष्ट करें
यदि कोई पौधा या नई कोंपल कीटों से बुरी तरह प्रभावित दिखाई देती है तो उसे खेत में ही छोड़ने के बजाय बाहर निकालकर नष्ट करने की सलाह दी गई है। इससे प्रभावित हिस्से से कीटों के दूसरे पौधों तक फैलने की संभावना को कम किया जा सकता है। किसानों को विशेष रूप से उन स्थानों पर नजर रखनी चाहिए जहां पौधों में असामान्य बदलाव, पत्तियों में नुकसान या कीटों की मौजूदगी दिखाई दे रही हो। शुरुआती स्तर पर प्रभावित हिस्सों को हटाना आगे होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है।
बिना जरूरत कीटनाशक डालने से बचें
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि केवल कीट दिखाई देने के डर से खेत में कीटनाशक का इस्तेमाल न करें। पहले यह पता लगाना जरूरी है कि फसल में किस प्रकार के कीट का प्रकोप है और उसकी स्थिति कितनी गंभीर है। इसके बाद ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाए जाने चाहिए। कीटनाशक का इस्तेमाल आवश्यक होने पर ही किया जाना चाहिए। दवा का चुनाव करते समय फसल की अवस्था और मौजूद कीट को ध्यान में रखना जरूरी है। साथ ही दवा की अनुशंसित मात्रा और इस्तेमाल से संबंधित निर्देशों का पालन करना चाहिए। अधिक मात्रा में या बार-बार कीटनाशक का इस्तेमाल करने से खेती की लागत बढ़ने के साथ फसल और खेत के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसानों को आवश्यकता के अनुसार ही इसका प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
कीट नियंत्रण के लिए अपनाएं एकीकृत उपाय
डॉ. पी. के. राय के अनुसार धान की फसल में कीटों को नियंत्रित करने के लिए केवल एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय आवश्यकता के अनुसार कई तरीकों को अपनाना अधिक प्रभावी हो सकता है। इसमें खेत की नियमित निगरानी, प्रभावित पौधों को हटाना, जैविक उपायों का इस्तेमाल और लाभकारी जीवों का संरक्षण शामिल है। इस तरह कीटों पर नियंत्रण रखने के साथ किसान फसल को अनावश्यक रासायनिक दवाओं से भी बचा सकते हैं। अलग-अलग उपायों को आवश्यकता के अनुसार अपनाने से फसल की सुरक्षा के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
प्राकृतिक शत्रु कीटों की भूमिका समझें
धान के खेतों में कुछ ऐसे कीट और जीव भी मौजूद होते हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों की संख्या को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इन्हें प्राकृतिक शत्रु कहा जाता है। किसानों को ऐसे लाभकारी जीवों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए। बिना जरूरत कीटनाशक डालने से हानिकारक कीटों के साथ ये लाभकारी जीव भी प्रभावित हो सकते हैं। इससे खेत में प्राकृतिक रूप से होने वाला कीट नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है।
आने वाले सप्ताहों में विशेष सावधानी बरतें
विशेषज्ञों ने धान किसानों को आने वाले कुछ सप्ताहों के दौरान फसल पर विशेष नजर रखने की सलाह दी है। इस अवधि में पत्तियों और नई कोंपलों में होने वाले बदलाव, पौधों की कमजोर स्थिति और खेत में कीटों की मौजूदगी पर लगातार ध्यान देना जरूरी है। यदि किसी हिस्से में कीटों की संख्या तेजी से बढ़ती दिखाई दे तो किसान बिना जानकारी के किसी भी दवा का इस्तेमाल करने से बचें। ऐसी स्थिति में कृषि विशेषज्ञों या कृषि विभाग से उचित सलाह लेकर ही नियंत्रण उपाय अपनाना अधिक सुरक्षित रहेगा।
समय पर पहचान से बच सकता है बड़ा नुकसान
धान की फसल को कीटों से बचाने के लिए समय पर पहचान और उचित नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण है। खेत की नियमित निगरानी से कीटों के शुरुआती प्रकोप का पता लगाया जा सकता है और समस्या को बड़े क्षेत्र में फैलने से पहले नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसानों को पहले निगरानी, फिर आवश्यकतानुसार प्रभावित पौधों को हटाने और जैविक तथा अन्य उपयुक्त उपाय अपनाने पर ध्यान देना चाहिए। कीटनाशक का इस्तेमाल अंतिम आवश्यकता के अनुसार और निर्धारित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। इससे धान की फसल को कीटों से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने और खेत के लाभकारी जीवों को सुरक्षित रखने में भी मदद मिल सकती है।
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