कृषि समाचार

महाराष्ट्र में आधुनिक और मुनाफे वाली खेती को बढ़ावा देने पर जोर

Emphasis on promoting profitable farming

नासिक: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कृषि महाविद्यालयों से खेती को आधुनिक, कम लागत वाली और अधिक मुनाफे वाली बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देकर खेती की लागत कम की जा सकती है और फसलों की पैदावार बढ़ाई जा सकती है। मुख्यमंत्री ने यह बात नासिक जिले के डिंडोरी तालुका के चाचडगांव में कर्मयोगी दुलाजी सीताराम पाटिल कृषि महाविद्यालय की नई इमारत के उद्घाटन समारोह में कही।

केवल कर्जमाफी से किसानों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि किसानों को हमेशा के लिए कर्ज के बोझ से बाहर निकालने के लिए केवल कर्जमाफी पर्याप्त नहीं है। सरकार ने पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान कर्जमाफी योजना के तहत किसानों के कर्ज माफ किए हैं, लेकिन अब ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिससे किसान खेती के माध्यम से स्थायी और बेहतर आमदनी हासिल कर सकें।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में करीब 80 प्रतिशत किसान छोटे जोत वाले हैं। इन किसानों के पास खेती में बड़े स्तर पर निवेश करने की क्षमता सीमित है। दूसरी ओर बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई और अन्य कृषि लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों के लिए कम खर्च में अधिक उत्पादन हासिल करना बेहद जरूरी हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि महाविद्यालय इस चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अनुसंधान और आधुनिक तकनीक को खेतों तक पहुंचाकर छोटे किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने की दिशा में काम किया जा सकता है।

अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने की जरूरत

देवेंद्र फडणवीस ने कृषि महाविद्यालयों में होने वाले अनुसंधान को किसानों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में तैयार होने वाली नई तकनीक और अनुसंधान का लाभ केवल शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे सीधे खेतों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

उन्होंने कृषि महाविद्यालयों से किसानों को उनकी मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार खाद के उचित इस्तेमाल की जानकारी देने को कहा। अलग-अलग फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए नए कृषि मॉडल तैयार करने और उन्हें खेतों में लागू करके उनकी उपयोगिता जांचने पर भी जोर दिया गया। सफल तकनीकों और कृषि पद्धतियों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने से खेती में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम किया जा सकता है। इससे छोटे किसानों को सीमित संसाधनों में बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिलेगी।

खेतों में नई तकनीकों का परीक्षण करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि महाविद्यालयों को केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नई तकनीकों और कृषि पद्धतियों का खेतों में परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि उनकी वास्तविक उपयोगिता सामने आ सके। जो तकनीक किसानों के लिए उपयोगी साबित हो, उसे व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे कृषि शिक्षा, अनुसंधान और खेती के बीच मजबूत संबंध स्थापित किया जा सकता है।

ज्यादा रासायनिक खाद से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित

मुख्यमंत्री ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लगातार अधिक मात्रा में रासायनिक खाद का इस्तेमाल करने से मिट्टी की गुणवत्ता और उसकी उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसी नई तकनीकों को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिनकी मदद से कम खाद का इस्तेमाल करके भी अच्छी पैदावार हासिल की जा सके। किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का इस्तेमाल करने की जानकारी देना भी कृषि महाविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हो सकती है। मुख्यमंत्री के अनुसार यदि किसानों को आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल सिखाया जाए तो खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है। इसके लिए कृषि महाविद्यालयों को किसानों के साथ सीधे जुड़कर काम करना चाहिए।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से खेती में बदलाव की उम्मीद

देवेंद्र फडणवीस ने कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल से खेती की लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी और पैदावार में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव हो सकती है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने महाविस्तार नामक अनुप्रयोग तैयार किया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से तैयार यह अनुप्रयोग किसानों को बुवाई से लेकर कटाई तक फसल के अलग-अलग चरणों में कृषि संबंधी सलाह देने का काम करता है। इसमें किसानों के सवालों के जवाब अलग-अलग भाषाओं में देने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इससे किसानों को अपनी जरूरत के अनुसार कृषि संबंधी जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है।

तकनीक को किसानों की जरूरत से जोड़ना जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक तभी उपयोगी साबित होगी, जब उसका इस्तेमाल किसानों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए किया जाए। कृषि महाविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों को किसानों की समस्याओं को समझकर उनके लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए। इससे कृषि शिक्षा और अनुसंधान का सीधा संबंध खेतों से स्थापित होगा और किसानों को नई तकनीक अपनाने में आसानी होगी।

नासिक को कृषि क्षेत्र की बड़ी ताकत बताया

मुख्यमंत्री फडणवीस ने नासिक जिले के कृषि क्षेत्र में योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नासिक देश के प्रमुख कृषि केंद्रों में शामिल है और यहां के किसान मेहनत के साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने बताया कि भारत से होने वाले अंगूर के निर्यात में नासिक की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत है। इसके अलावा नासिक का प्याज भी देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की उपज को प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ने पर कृषि क्षेत्र के साथ रोजगार और कारोबार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं। कृषि शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं को खेती के साथ उपज प्रसंस्करण और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तैयार हों कृषि विद्यार्थी

कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री और नासिक जिले के प्रभारी मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि कृषि क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। किसानों को जलवायु परिवर्तन सहित कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में कृषि महाविद्यालयों को विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीक की जानकारी देने के साथ उन्हें बदलती परिस्थितियों के लिए भी तैयार करना चाहिए। कृषि शिक्षा संस्थानों से ऐसे वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने की जरूरत है, जो खेती की समस्याओं का समाधान खोज सकें। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर ध्यान देना होगा। कृषि शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक और प्रसंस्करण को एक साथ जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

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