पशुपालन

हरे चारे की समस्या का समाधान: मक्के की इस किस्म से होगी दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी और अतिरिक्त कमाई

नई दिल्ली: देशभर के पशुपालक किसान अक्सर हरे चारे की कमी से जूझते हैं। भले ही वे अपने पशुओं की देखभाल में कोई कसर न छोड़ें, लेकिन चारे की उपलब्धता एक ऐसी समस्या है जो लंबे समय से उनके सामने बनी हुई है। इस चुनौती का समाधान अब मक्के की खास किस्म ‘J-1006’ बन सकती है, जिसकी खेती न केवल पशुओं के लिए हरे चारे की स्थायी व्यवस्था करती है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का साधन भी प्रदान करती है। ‘J-1006’ मक्का मुख्य रूप से चारे के उद्देश्य से विकसित एक विशेष किस्म है, जिसे राष्ट्रीय बीज निगम द्वारा पेश किया गया है। यह किस्म पशुओं के लिए अत्यंत पौष्टिक मानी जाती है और इसमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है। मक्के का यह हरा चारा गाय, भैंस, बकरी और भेड़ों के लिए आदर्श आहार माना गया है, जो उनके दूध उत्पादन और उसकी गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाता है।

इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पत्ती झुलसा और भूरी धारीदार डीएम जैसी आम बीमारियों से सुरक्षित रहती है। साथ ही, प्रति हेक्टेयर 400 से 500 क्विंटल तक उपज देने में सक्षम है, जिससे किसान हरे चारे के साथ-साथ फसल बेचकर भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। ‘J-1006’ मक्के की खेती करना भी अपेक्षाकृत सरल है। इसकी बुवाई के 70 से 75 दिनों के भीतर फसल कटाई योग्य हो जाती है। इस दौरान इसके भुट्टे दूधिया अवस्था में होते हैं, जो चारे के रूप में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 20 से 22 किलो बीज की आवश्यकता होती है, और इसकी पंक्तियों के बीच 60 सेमी तथा पौधों के बीच 20 से 25 सेमी की दूरी बनाए रखना जरूरी है।

इस बीज को किसान ONDC ऑनलाइन स्टोर या राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट से ऑर्डर कर घर बैठे मंगवा सकते हैं। वर्तमान में यह बीज 33% छूट के साथ केवल 280 रुपये में 5 किलो बैग की पैकिंग में उपलब्ध है, जो किसानों के लिए बेहद किफायती विकल्प है। इस प्रकार मक्के की ‘J-1006’ किस्म पशुपालकों के लिए एक भरोसेमंद समाधान बनकर सामने आई है। यह न केवल हरे चारे की कमी को दूर करती है, बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

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