नई दिल्ली: बरसात और बाढ़ का मौसम पशुओं के लिए भी गंभीर खतरा लेकर आता है। इस दौरान तालाब, पोखर और कुओं का पानी दूषित हो जाता है, जिसमें बैक्टीरिया और हानिकारक कीटाणु तेजी से पनपने लगते हैं। जब गाय, भैंस, बकरी और भेड़ जैसे पशु इस गंदे पानी को पीते हैं तो वे पेट संबंधी रोगों और संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। कई बार यह संक्रमण इतना गंभीर हो जाता है कि पशुओं की जान पर भी बन आती है।
बरसात में जगह-जगह जमा पानी जल्दी खराब हो जाता है और उसमें मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। गांवों में पोखर और तालाब का पानी अक्सर कीटाणुओं से भर जाता है। अगर पशु चरने जाते समय या लौटते वक्त इस पानी को पी लेते हैं तो वे गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं। ऐसे हालात में जरूरी है कि पशुपालक अपने पशुओं को घर पर ही साफ और ताजा पानी पिलाएं और तालाब या पोखर से दूर रखें। यदि कहीं पानी जमा हो गया है तो उसमें दवा डालना भी जरूरी है ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके।
सिर्फ पानी ही नहीं बल्कि हरे चारे के मामले में भी बरसात और बाढ़ का मौसम चुनौती लेकर आता है। इस दौरान हरे चारे में नमी की मात्रा अधिक हो जाती है और उस पर कीड़े-मकोड़े और बैक्टीरिया आसानी से बैठ जाते हैं। अधिक नमी वाला चारा खिलाने से पशुओं को दस्त या डायरिया की समस्या हो सकती है। इसलिए पशुपालक हरे चारे को पहले काटकर हल्का सुखाएं और फिर पशुओं को खिलाएं। इससे उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा और उत्पादकता पर भी असर नहीं पड़ेगा।
बरसात और बाढ़ के समय पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे आसान तरीका यही है कि उन्हें साफ पानी पिलाया जाए और चारे को सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराया जाए। अगर समय रहते सावधानी बरती जाए तो संक्रमण और बीमारियों का खतरा काफी हद तक टाला जा सकता है।
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