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नई यूरिया नीति को मंजूरी, देश में लगेंगे 9 नए यूरिया संयंत्र

Urea Policy 2026

नई दिल्ली: देश को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय निवेश नीति फॉर यूरिया-2026 को मंजूरी दे दी है। नई नीति के तहत देश में 8 से 9 नए गैस आधारित यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिनकी कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता एक करोड़ टन होगी। सरकार का उद्देश्य घरेलू निवेश बढ़ाना, यूरिया आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों को समय पर सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराना है।

हर वर्ष बढ़ रही है यूरिया की मांग

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में यूरिया की मांग हर वर्ष लगभग 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। पिछले दस वर्षों में 12.7 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाले छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए हैं, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए अतिरिक्त उत्पादन क्षमता की आवश्यकता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में वर्ष 2018 के बाद यूरिया की कीमतों में तीन से चार गुना तक वृद्धि हुई है। इसके बावजूद किसानों को 45 किलोग्राम यूरिया का बैग 242 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। नई नीति का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाकर किसानों को समय पर और किफायती दरों पर यूरिया उपलब्ध कराना है।

नई नीति में निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर

सरकार ने नई यूरिया परियोजनाओं में निवेश को आकर्षित करने के लिए 12 से 16 प्रतिशत तक सुनिश्चित प्रतिफल का प्रावधान किया है। इससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को नए यूरिया संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। नई नीति के तहत स्थिर लागत और परिवर्तनीय लागत की गणना अलग-अलग की जाएगी। इससे परियोजनाओं की लागत का अधिक पारदर्शी आकलन संभव होगा और निवेशकों को स्पष्ट नीति ढांचा मिलेगा।

विनिमय दर के जोखिम को किया जाएगा कम

नई नीति में विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम को कम करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत डॉलर में होने वाली स्थिर लागत को चार वर्ष बाद रुपये में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम होगा। इससे कंपनियों और सरकार दोनों पर वित्तीय दबाव घटेगा तथा उर्वरक सब्सिडी प्रबंधन अधिक स्थिर और अनुमानित बन सकेगा।

नए संयंत्रों से बढ़ेगा घरेलू उत्पादन

राष्ट्रीय निवेश नीति फॉर यूरिया-2026 के तहत नई और मौजूदा दोनों प्रकार की यूरिया परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना और मांग तथा उत्पादन के बीच के अंतर को समाप्त करना है। इससे देश की उर्वरक सुरक्षा मजबूत होगी और वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराया जा सकेगा।

हर नए संयंत्र से होगी बड़ी बचत

केंद्रीय मंत्री के अनुसार नई नीति के तहत स्थापित होने वाले प्रत्येक नए यूरिया संयंत्र पर लगभग 250 करोड़ रुपये तक की बचत होने का अनुमान है। इससे परियोजनाओं की लागत कम होगी और नए निवेश अधिक व्यवहारिक बन सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह नीति आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने के साथ-साथ उर्वरक क्षेत्र में दीर्घकालीन निवेश को बढ़ावा देगी। साथ ही प्राकृतिक गैस आधारित आधुनिक संयंत्रों की स्थापना से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और वैश्विक आपूर्ति संकट या अंतरराष्ट्रीय तनाव की स्थिति में भी देश की खाद सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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