कृषि समाचार

बढ़ता तापमान चावल उत्पादन के लिए ख़तरे का संकेत

rice production decline forecast

नई दिल्ली: भारत में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले अनाज चावल पर बड़ा संकट मंडराता दिख रहा है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार वर्ष 2050 तक चावल उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है, जो 2080 तक बढ़कर लगभग 47 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। यह स्थिति देश की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है, जिसका मुख्य कारण बदलता मौसम और बढ़ता तापमान माना जा रहा है।

जलवायु बदलाव से बढ़ेगा असर

कृषि अनुसंधान से जुड़े एक सरकारी अध्ययन में बताया गया है कि यदि समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो चावल के साथ-साथ गेहूं और मक्का के उत्पादन में भी भारी गिरावट आ सकती है। बारिश पर निर्भर धान की पैदावार में 2050 तक करीब 20 प्रतिशत और 2080 तक लगभग 47 प्रतिशत तक कमी आने की आशंका जताई गई है। वहीं सिंचित धान में भी उत्पादन घटने का खतरा बना हुआ है।

अन्य फसलों पर भी संकट

अध्ययन के अनुसार गेहूं के उत्पादन में 2050 तक लगभग 19 प्रतिशत और 2080 तक करीब 40 प्रतिशत तक गिरावट हो सकती है। वहीं खरीफ मक्का के उत्पादन में भी 2050 तक लगभग 18 प्रतिशत और 2080 तक करीब 23 प्रतिशत कमी का अनुमान है। इससे आने वाले समय में खाद्यान्न उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।

कई जिले उच्च जोखिम में

देश के 651 कृषि प्रधान जिलों के आकलन में बड़ी संख्या में क्षेत्रों को संवेदनशील पाया गया है। इनमें 109 जिलों को अत्यधिक संवेदनशील और 201 जिलों को उच्च संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में खेती पर मौसम के बदलाव का असर तेजी से देखने को मिल सकता है।

बदलते मौसम से खेती प्रभावित

तापमान में वृद्धि और बारिश के बदलते पैटर्न ने खेती को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कुछ इलाकों में समय से पहले बारिश हो रही है, जबकि मुख्य मौसम में कमी देखी जा रही है। इससे बुवाई और फसल की शुरुआती वृद्धि पर असर पड़ रहा है, जो अंततः उत्पादन को प्रभावित करता है।

समाधान के लिए प्रयास जारी

सरकार ने खेती को मौसम के अनुकूल बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इसमें कम पानी में खेती, उन्नत बीज और नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न जिलों के लिए विशेष योजनाएं तैयार की गई हैं, ताकि किसान बदलते मौसम के प्रभाव से निपट सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते इन उपायों को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी है, तभी भविष्य में खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

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