कृषि समाचार

रिकॉर्ड स्तर पर चावल की खरीद, बाजार पर असर के संकेत

Purchase of rice

नई दिल्ली: भारत में इस वर्ष चावल की खरीद ने नया मुकाम हासिल किया है। अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच सरकार ने करीब 50 मिलियन टन चावल की खरीद की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत अधिक है। यह दर्शाता है कि इस बार उत्पादन अच्छा रहा और किसानों से बड़ी मात्रा में फसल खरीदी गई है। रबी मौसम में भी खरीद बढ़ने से सरकारी भंडार मजबूत हुआ है, जिससे अब बाजार प्रबंधन को लेकर नई रणनीति पर विचार किया जा रहा है।

लक्ष्य के करीब पहुंची खरीद

सरकार ने 2025-26 मौसम के लिए कुल 56.66 मिलियन टन चावल खरीद का लक्ष्य तय किया है। अप्रैल के अंत तक लगभग 49.86 मिलियन टन चावल खरीदा जा चुका है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 47.02 मिलियन टन था। इस बढ़त से किसानों को फायदा हुआ है क्योंकि उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सका है।

राज्यों की बदलती भूमिका

इस वर्ष चावल खरीद में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों का योगदान उल्लेखनीय रहा है। आंध्र प्रदेश में खरीद में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में भी खरीद बढ़ी है। इसके विपरीत पंजाब और हरियाणा जैसे पारंपरिक राज्यों में हल्की गिरावट देखी गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि चावल उत्पादन और खरीद का दायरा अब अन्य राज्यों तक फैल रहा है।

बढ़ते भंडार से नई चुनौती

इतनी बड़ी मात्रा में चावल खरीदने के बाद अब सरकार के सामने भंडारण और प्रबंधन की चुनौती खड़ी हो गई है। अधिक स्टॉक को सही समय पर उपयोग में लाने के लिए सरकार खुले बाजार में बिक्री, राज्यों को आवंटन और अन्य उपयोगों की योजना बना रही है। खासकर वैकल्पिक उपयोग के रूप में चावल की मांग बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उत्पादन में भी रिकॉर्ड वृद्धि

कृषि मंत्रालय के अनुसार 2025-26 में खरीफ मौसम में चावल का उत्पादन रिकॉर्ड 123.93 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है। रबी मौसम में भी उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है। उत्पादन और खरीद दोनों बढ़ने से किसानों की आय में सुधार की संभावना बढ़ी है।

बाजार पर संभावित असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार बड़े पैमाने पर चावल को बाजार में उतारती है, तो कीमतों पर प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही वैकल्पिक उपयोग बढ़ने से मांग में भी बदलाव आ सकता है। कुल मिलाकर, इस बार चावल की बढ़ी हुई खरीद और उत्पादन देश की कृषि व्यवस्था के मजबूत होने और बदलते रुझानों का संकेत देती है।

ये भी पढ़ें: पंजाब में मक्का खेती योजना, किसानों को प्रति हेक्टेयर मिलेंगे 17500 रुपये

Related posts

Leave a Comment