कृषि समाचार

नासिक में बारिश से प्याज की फसल तबाह, उत्पादन घटने की आशंका

Rain in Nashik onion farmers

नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले की पांच तालुकों में चार हजार पांच सौ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्याज की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों के अनुसार इस आपदा के कारण इस मौसम में कुल उत्पादन में बारह से पंद्रह प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।

कई तालुकों में बड़े पैमाने पर नुकसान

कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार सबसे अधिक नुकसान मालेगांव क्षेत्र में हुआ है, जहां एक हजार छह सौ छियालीस हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। इसके बाद सटाणा में एक हजार पांच सौ अट्ठानवे हेक्टेयर क्षेत्र में नुकसान दर्ज किया गया है। वहीं नंदगांव, निफाड़ और सिन्नर में करीब नौ सौ पचास हेक्टेयर फसल खराब हुई है।

रबी प्याज के रकबे में पहले ही आई थी कमी

इस वर्ष नासिक में रबी प्याज की खेती का रकबा पहले ही घट चुका था। पिछले साल के मुकाबले करीब दस प्रतिशत कमी के साथ यह क्षेत्रफल घटकर लगभग एक लाख साठ हजार हेक्टेयर रह गया था। ऐसे में अब हुई बारिश से उत्पादन पर और अधिक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अनुमान है कि कुल उत्पादन घटकर लगभग चौंतीस लाख मीट्रिक टन रह सकता है।

ओलावृष्टि से अन्य फसलों को भी नुकसान

गुरुवार को हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि से जिले में कुल मिलाकर करीब सात हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। इसमें सबसे अधिक नुकसान गर्मियों की प्याज को हुआ है। इसके अलावा अनार के बागों को भी नुकसान पहुंचा है, जहां एक हजार तीन सौ सतहत्तर हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है।

मंडियों में आवक बढ़ी, कीमतें कम

इसी बीच मंडियों में प्याज की आवक में बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि बाजार में देर से आने वाली खरीफ प्याज का दबदबा बना हुआ है, जो कुल आवक का लगभग अस्सी प्रतिशत है। किसानों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से कीमतें लागत से नीचे बनी हुई हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है।

किसानों ने मांगा अनुदान

किसानों के अनुसार प्याज उत्पादन की लागत लगभग एक हजार आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार में इससे कम कीमत मिल रही है। ऐसे में उन्होंने राज्य सरकार से प्रति क्विंटल पंद्रह सौ रुपये का अनुदान देने की मांग की है, ताकि उन्हें हो रहे नुकसान की भरपाई हो सके।

आपूर्ति पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों की प्याज बाजार में लंबे समय तक टिकती है और आपूर्ति को संतुलित बनाए रखती है। ऐसे में उत्पादन में गिरावट आने से आने वाले महीनों में प्याज की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे बाजार में कमी की स्थिति भी बन सकती है।

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