नई दिल्ली: देश में प्याज किसानों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। जहां एक ओर आम उपभोक्ता महंगाई की मार झेल रहा है, वहीं दूसरी ओर प्याज की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश और गुजरात तक, कई राज्यों की मंडियों में प्याज बेहद कम दामों पर बिक रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले की कर्जत मंडी में किसानों को प्याज महज 1 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचना पड़ा। वहीं सोलापुर की मंगलवेढ़ा मंडी में भी किसानों को सिर्फ 2 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेचना पड़ा है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की 29 जून की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में प्याज का औसत भाव 14.69 रुपये प्रति किलो रहा, जो पिछले साल इसी तारीख को 25.02 रुपये प्रति किलो था। यानी एक साल में प्याज के दाम 41.27 फीसदी तक गिर गए हैं। ऐसे में जहां महंगाई के अनुरूप कीमतें बढ़नी चाहिए थीं, वहां कीमतें लगातार घटती जा रही हैं, जिससे किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है।
गुजरात की मंडियों में 30 जून को प्याज के भाव
गुजरात के जामनगर मंडी में प्याज का न्यूनतम भाव 150 रुपये प्रति क्विंटल यानी 1.50 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जो किसानों के लिए चिंता का विषय है। वहीं खंभात मंडी में अधिकतम भाव 2500 रुपये प्रति क्विंटल यानी 25 रुपये प्रति किलो रहा। बिलिमोरा, दाहोद और महुवा जैसे अन्य मंडियों में मॉडल प्राइस औसतन 1100 से 1500 रुपये के बीच रहा।
हरियाणा की मंडियों में स्थिति कुछ बेहतर
हरियाणा में प्याज का न्यूनतम भाव गोहाना और गुड़गांव में 1000 रुपये प्रति क्विंटल यानी 10 रुपये प्रति किलो रहा। वहीं छछरौली मंडी में अधिकतम भाव 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा। प्रदेश की अधिकांश मंडियों में प्याज की कीमतें 1500 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रही हैं।
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा नुकसान
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में किसानों को प्याज की बिक्री में भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। कर्जत मंडी में प्याज की न्यूनतम कीमत 100 रुपये प्रति क्विंटल यानी 1 रुपये प्रति किलो रही, जो अब तक की सबसे कम दरों में से एक है। छत्रपति संभाजीनगर, देवाला और कराड में भी कीमतें बेहद कम रही। कोल्हापुर मंडी में जरूर 2100 रुपये क्विंटल का अधिकतम भाव दर्ज किया गया, लेकिन यह राहत केवल कुछ ही किसानों के हिस्से आई।
उत्तर प्रदेश की मंडियों में भी गिरावट
उत्तर प्रदेश की मंडियों में प्याज की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहीं, लेकिन यहां भी किसानों को मनचाहा दाम नहीं मिल पाया। अकबरपुर और अलीगढ़ में न्यूनतम भाव 1180 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि आनंदनगर में अधिकतम भाव 1800 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।
किसान निराश, सरकारी हस्तक्षेप की मांग
प्याज की कीमतों में इस भारी गिरावट से किसानों की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि खाद, बीज, मजदूरी और परिवहन पर भारी खर्च करने के बाद अगर उपज का दाम इतना कम मिले, तो खेती करना ही घाटे का सौदा हो जाएगा। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार प्याज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करे या बफर स्टॉक बनाकर कीमतों को स्थिर बनाए। कुल मिलाकर, देश के प्याज उत्पादक किसानों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। जरूरत है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नीतिगत हस्तक्षेप करें, ताकि किसानों की मेहनत और लागत दोनों सुरक्षित रह सकें।
