खेती-किसानी

सरसों की खेती में खरपतवार और कीट नियंत्रण जरूरी

Mustard cultivation

नई दिल्ली: सरसों की खेती देश के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल मानी जाती है. इससे खाद्य तेल की आपूर्ति होती है और किसानों की आमदनी भी बढ़ती है. हालांकि अगर खेत में समय पर खरपतवार और कीटों पर नियंत्रण नहीं किया जाए, तो सरसों की पैदावार पर सीधा असर पड़ता है. विशेषज्ञों के अनुसार साफ खेत और स्वस्थ पौधे सरसों की अच्छी उपज की बुनियाद होते हैं.

खरपतवार से कैसे होता है नुकसान

खरपतवार वे अनचाहे पौधे होते हैं, जो सरसों के साथ खेत में उग जाते हैं. ये पौधे मिट्टी से पोषक तत्व, पानी और जगह छीन लेते हैं, जिससे सरसों के पौधे कमजोर हो जाते हैं और उनकी बढ़वार रुक जाती है. अगर खेत खरपतवार मुक्त रहे, तो सरसों की फसल तेजी से बढ़ती है और बेहतर उत्पादन देती है.

निराई-गुड़ाई से मजबूत होती है फसल

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक सरसों की बुआई के 20 से 25 दिन बाद एक बार निराई-गुड़ाई करना बेहद फायदेमंद होता है. इससे खरपतवार तो निकलते ही हैं, साथ ही मिट्टी भी भुरभुरी हो जाती है. नरम मिट्टी में पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है.

दवा से खरपतवार नियंत्रण का तरीका

अगर किसान रासायनिक तरीके से खरपतवार को नियंत्रित करना चाहते हैं, तो बुआई से पहले या बुआई के बाद दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है. बुआई से पहले फ्लूक्लोरेलिन का छिड़काव किया जाता है, जिसे पानी में मिलाकर पूरे खेत में समान रूप से डालना चाहिए. इससे खरपतवार उगने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं. वहीं बुआई के बाद लेकिन बीज अंकुरित होने से पहले पेण्डीमेथिलीन दवा का छिड़काव किया जाता है. यह दवा भी खरपतवार को पनपने नहीं देती. दवा की मात्रा और समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है.

पौधों की सही दूरी रखना क्यों जरूरी

जब सरसों के पौधे बहुत पास-पास उगते हैं, तो उनमें पोषक तत्वों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है. इसलिए बुआई के 15 से 20 दिन बाद कमजोर और अतिरिक्त पौधों को निकाल देना चाहिए. पौधों के बीच लगभग 15 सेंटीमीटर की दूरी रखने से हर पौधे को पर्याप्त पोषण, पानी और धूप मिलती है.

कीटों से सरसों की फसल को खतरा

सरसों की फसल पर माहूं और आरा मक्खी जैसे कीटों का हमला सबसे ज्यादा देखा जाता है. माहूं पौधों का रस चूस लेता है, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और उत्पादन घट जाता है. कई मामलों में इससे तेल की मात्रा भी कम हो जाती है. खेत में अगर बड़ी संख्या में कीट नजर आने लगें, तो तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाने चाहिए.

कीट नियंत्रण से सुरक्षित होगी फसल

कीटों से बचाव के लिए किसान कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं. इन दवाओं को पानी में मिलाकर पूरे खेत में समान रूप से छिड़कना चाहिए, ताकि पौधे पूरी तरह भीग जाएं. सही समय पर दवा डालने से कीट नष्ट हो जाते हैं और फसल सुरक्षित रहती है.

समय पर देखभाल से बढ़ेगा मुनाफा

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान समय पर खरपतवार नियंत्रण और कीट प्रबंधन पर ध्यान दें, तो सरसों की फसल से बेहतर पैदावार मिल सकती है. इससे दानों की संख्या बढ़ती है, तेल की मात्रा ज्यादा होती है और किसानों की आय में भी अच्छा इजाफा होता है.

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