चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने खरीफ-2025 सीजन के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2025 निर्धारित की है। इस फैसले से राज्य के किसानों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि वे अब निर्धारित समय में अपनी कई फसलों का बीमा करवा सकेंगे। यह योजना उन किसानों के लिए अहम है जो धान, बाजरा, मक्का और कपास जैसी मुख्य खरीफ फसलों की खेती कर रहे हैं। राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि फसल बीमा योजना प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से किसानों को सुरक्षा प्रदान करती है। बारिश, सूखा, कीटों का प्रकोप, ओलावृष्टि या अन्य किसी आपदा से यदि फसलें खराब होती हैं तो किसान को आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। यही कारण है कि सरकार लगातार इस योजना को प्रोत्साहित कर रही है।
खरीफ-2025 सीजन के लिए विभिन्न फसलों की बीमा प्रीमियम दरें भी तय की गई हैं। धान की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 2124.98 रुपये, बाजरा के लिए 1024.36 रुपये, मक्का के लिए 1089.74 रुपये और कपास के लिए 5435.05 रुपये की दर से प्रीमियम तय किया गया है। किसान इन निर्धारित दरों के अनुसार बीमा करा सकते हैं और किसी भी आपदा से फसल को बचाने की दिशा में एक मजबूत कदम उठा सकते हैं। योजना के तहत ऋणी किसानों के लिए बीमा लेना वैकल्पिक है। यदि कोई ऋणी किसान बीमा नहीं कराना चाहता है, तो उसे 24 जुलाई 2025 तक संबंधित बैंक को लिखित रूप से सूचित करना होगा। इसके साथ ही, उसे ‘ऑप्ट आउट’ प्रक्रिया के तहत पोर्टल पर भेजे गए ओटीपी को बैंक को देना होगा, तभी उसकी बीमा से बाहर निकलने की प्रक्रिया पूरी होगी।
गैर ऋणी किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपनी जमीन की फर्द, बैंक खाता, आधार कार्ड, फसल बिजाई प्रमाणपत्र और ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पंजीकरण जैसी जानकारी के साथ अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आवेदन करना होगा। इसके अतिरिक्त किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की वेबसाइट https://pmfby.gov.in पर भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वहीं, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप या AIDE ऐप के माध्यम से भी फसल बीमा का रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। फसल बीमा योजना से जुड़कर किसान अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकते हैं। 31 जुलाई 2025 तक आवेदन की खुली समयसीमा किसानों को बीमा कराने के लिए पर्याप्त अवसर देती है। यह पहल न केवल फसल उत्पादन की सुरक्षा में मददगार है, बल्कि किसानों की आजीविका को भी स्थिरता प्रदान करती है।
