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ईरान युद्ध का असर: जेएनपीटी पर 4500 टन प्याज फंसा, किसान चिंतित

Iran War onion trucks

मुंबई: ईरान युद्ध का असर भारत से प्याज निर्यात पर साफ दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र से बड़े पैमाने पर होने वाला निर्यात प्रभावित हुआ है और नासिक समेत राज्य के अन्य हिस्सों के निर्यातकों के 150 से अधिक कंटेनर जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर फंसे हुए हैं। यह खेप मुख्य रूप से दुबई के रास्ते खाड़ी देशों के लिए भेजी जानी थी, लेकिन मौजूदा हालात के चलते दुबई का बाजार अस्थायी रूप से बंद हो गया है।

प्रत्येक कंटेनर में औसतन 29 से 30 टन प्याज भरा होता है। इस तरह लगभग 4,500 टन प्याज फिलहाल बंदरगाह पर अटका हुआ है। निर्यातकों का कहना है कि यदि स्थिति लंबी चली तो उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है और घरेलू बाजार में कीमतों पर भी दबाव बढ़ेगा।

मुंबई के एक बड़े निर्यातक ने बताया कि उनके अकेले के करीब आठ कंटेनर फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह खेप ईद से पहले पहुंचनी थी, लेकिन अब स्थिति अनिश्चित है। दुबई के जेबेल अली पोर्ट पर आंशिक रूप से काम शुरू होने की खबर है, परंतु कई शिपिंग कंपनियां दुबई के लिए जहाज भेजने से हिचक रही हैं।

यूरोप जाने वाला कार्गो भी प्रभावित

निर्यातकों के अनुसार समस्या केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है। यूरोप जाने वाला अधिकांश माल भी इसी मार्ग से जाता था। मौजूदा हालात में जहाजों को स्वेज नहर मार्ग से रोककर केप ऑफ गुड होप के रास्ते मोड़ा जा रहा है, जिससे ट्रांजिट समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं। कुछ महीने पहले ही यूरोप के लिए परिवहन व्यवस्था स्थिर हुई थी, लेकिन अब फिर अनिश्चितता बढ़ गई है।

निर्यातकों का कहना है कि ईद से पहले की मांग लगभग शून्य हो गई है, जिससे व्यापार पर बुरा असर पड़ा है। यदि निर्यात जल्द शुरू नहीं हुआ तो घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में और गिरावट आ सकती है। लंबे समय तक कंटेनरों में रखे रहने से प्याज के खराब होने का भी खतरा है।

किसानों ने मांगी सब्सिडी

प्याज उत्पादक किसान पहले से कम कीमत, बढ़ती उत्पादन लागत और निर्यात नीति की अनिश्चितता से जूझ रहे थे। अब युद्ध जैसी स्थिति ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। महाराष्ट्र स्टेट अनियन प्रोड्यूसर फार्मर्स ऑर्गनाइज़ेशन के अध्यक्ष भरत दिघोले ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

उन्होंने 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी, फंसे कंटेनरों के पोर्ट शुल्क और डेमरेज माफ करने, निर्यात बहाल होने तक अस्थायी खरीद योजना शुरू करने और युद्ध की स्थिति पर सरकार की स्पष्ट नीति घोषित करने की मांग की है।

फिलहाल निर्यात कब सामान्य होगा और दुबई का बाजार कब पूरी तरह खुलेगा, इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है, जिससे किसानों और व्यापारियों में अनिश्चितता बनी हुई है।

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