लखनऊ: अभी हाल ही में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता सम्पन्न हुआ है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के मध्य हुआ यह समझौता उत्तर प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए इस ऐतिहासिक करार से भारत को विश्वसनीय वैश्विक बाजारों के साथ मजबूत एकीकरण का अवसर मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार, उद्योग, कृषि और श्रम-प्रधान राज्य उत्तर प्रदेश के लिए यह समझौता निर्यात, निवेश और रोजगार के लिहाज से मील का पत्थर माना जा रहा है। 27 यूरोपीय देशों के लगभग 45 करोड़ उपभोक्ताओं वाले विशाल बाजार तक आसान पहुंच मिलने से यूपी के पारंपरिक उद्योगों से लेकर आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तक को सीधा लाभ मिलेगा।
श्रम-गहन उद्योगों के लिए गेम-चेंजर बनेगा एफटीए
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते का सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश के श्रम-गहन उद्योगों को मिलने की उम्मीद है। चमड़ा, फुटवियर, वस्त्र, हस्तशिल्प, कालीन, पीतल उद्योग, फूड प्रोसेसिंग और एमएसएमई आधारित इकाइयां इस करार से सीधे तौर पर लाभान्वित होंगी। कम या शून्य टैरिफ के चलते इन उत्पादों की यूरोपीय बाजार में कीमत प्रतिस्पर्धी होगी, जिससे निर्यात बढ़ेगा और उत्पादन क्षमता का विस्तार होगा।
कानपुर और आगरा के चमड़ा उद्योग को मिलेगा नया जीवन
कानपुर और आगरा लंबे समय से देश के प्रमुख चमड़ा और फुटवियर उत्पादन केंद्र रहे हैं। इंडिया-ईयू एफटीए के तहत 17 प्रतिशत तक के टैरिफ के शून्य होने से यहां के जूते, लेदर गुड्स और एक्सेसरीज़ यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इसका सीधा लाभ हजारों टैनरियों, एमएसएमई इकाइयों और उनसे जुड़े कारीगरों को मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सहारनपुर, मुरादाबाद और भदोही के कारीगरों की बढ़ेगी आय
सहारनपुर का लकड़ी आधारित हस्तशिल्प और फर्नीचर, मुरादाबाद का पीतल उद्योग और भदोही का कालीन उद्योग पहले से ही निर्यात पर निर्भर हैं। एफटीए के बाद इन उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच और स्थिर मांग मिलने की संभावना है। इससे कारीगरों को नियमित ऑर्डर, बेहतर आमदनी और वैश्विक स्तर पर ब्रांड पहचान मिलेगी। ओडीओपी योजना के तहत चिन्हित इन जिलों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
किसानों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार का लाभ
यह समझौता केवल औद्योगिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए भी यह एफटीए नए अवसर खोलेगा। चाय, कॉफी, मसाले, फल-सब्जियां, डेयरी उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से किसानों की आय बढ़ने की संभावना है। इससे एफपीओ, कोल्ड चेन नेटवर्क, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और ग्रामीण रोजगार को मजबूती मिलेगी।
एमएसएमई, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
उत्तर प्रदेश का एमएसएमई सेक्टर इस समझौते का प्रमुख लाभार्थी माना जा रहा है। निर्यात आधारित उत्पादन बढ़ने से महिलाओं की भागीदारी, घरेलू कारीगरों की आय और युवाओं के लिए स्किल्ड व सेमी-स्किल्ड नौकरियों में तेजी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, डिज़ाइन, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और ई-कॉमर्स जैसे सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
यूरोपीय निवेश के लिए यूपी बनेगा आकर्षक केंद्र
इंडिया-ईयू एफटीए उत्तर प्रदेश को यूरोपीय कंपनियों के लिए एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बेस के रूप में स्थापित करता है। राज्य के विस्तृत एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरिडोर, औद्योगिक पार्क और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में यूरोपीय निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलने और रोजगार के बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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