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यूपी में अवैध चूहनाशक पर रोक, ऑनलाइन बिक्री पर सख्त कार्रवाई

Illegal rat poison in UP

लखनऊ: यूपी में अवैध चूहनाशक की बिक्री पर अब कठोर कार्रवाई होगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में ऑनलाइन मंचों पर बिक रहे अवैध और घातक चूहनाशक उत्पादों, विशेषकर पीले और सफेद फॉस्फोरस युक्त रैटोल पेस्ट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णय भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से प्राप्त सूचना के आधार पर लिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आम जनता के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

अवैध कीटनाशक और बढ़ता खतरा

कीटनाशी अधिनियम 1968 के अनुसार देश में केवल वही कीटनाशक बनाए और बेचे जा सकते हैं जो केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति में पंजीकृत हों। पीले और सफेद फॉस्फोरस युक्त तीन प्रतिशत पेस्ट इस सूची में शामिल नहीं हैं, जिससे इनका निर्माण, भंडारण और बिक्री पूरी तरह अवैध हो जाता है। यह रसायन अत्यंत विषैला और ज्वलनशील होता है। इसकी थोड़ी सी मात्रा भी शरीर में जाने पर गंभीर बीमारी या मृत्यु का कारण बन सकती है। ऑनलाइन माध्यमों पर इसकी उपलब्धता ने इसके दुरुपयोग का खतरा और बढ़ा दिया था।

ऑनलाइन मंचों के लिए सख्त निर्देश

यूपी में अवैध चूहनाशक की बिक्री पर रोक लगाने के लिए सरकार ने सभी ऑनलाइन व्यापार संचालकों को आदेश दिया है कि वे अपने मंचों से ऐसे सभी उत्पादों को तुरंत हटा दें। भविष्य में भी इन उत्पादों को सूचीबद्ध करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल वैध अनुज्ञापत्र धारक विक्रेता ही कीटनाशक उत्पादों की बिक्री कर सकेंगे। सभी कंपनियों को उपभोक्ता संरक्षण नियम 2020 का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा।

निगरानी और कड़ी कार्रवाई

राज्य सरकार ने जिला स्तर पर कृषि रक्षा अधिकारियों और कीटनाशी निरीक्षकों को भी कड़े निर्देश दिए हैं। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कीटनाशकों की निगरानी बढ़ानी होगी। यदि कहीं भी इन उत्पादों का भंडारण या बिक्री पाई जाती है, तो कीटनाशी अधिनियम 1968 और नियमावली 1971 के तहत तुरंत कार्रवाई की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी दंड भी सुनिश्चित किया जाएगा।

जनता की सुरक्षा सर्वोपरि

उत्तर प्रदेश सरकार का उद्देश्य घातक और अवैध रसायनों के प्रसार को रोकना है, ताकि नागरिकों, किसानों और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि सरकार जनस्वास्थ्य की रक्षा के साथ-साथ ऑनलाइन व्यापार में नियमों के पालन को लेकर भी पूरी तरह सतर्क है। इस पहल से अब ऐसे खतरनाक उत्पादों की उपलब्धता पर रोक लगेगी और समाज में सुरक्षा का स्तर और मजबूत होगा।

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