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मछली पालन के लिए तालाब में मजबूत बाँध बनाना जरूरी, विशेषज्ञों की सलाह

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नई दिल्ली: मछली पालन के लिए तालाब निर्माण में बांध की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार बांध इतना मजबूत होना चाहिए कि वह पानी के दबाव को सह सके और बरसात के दौरान होने वाले जलभराव से भी प्रभावित न हो। यदि बांध मजबूत नहीं होगा तो पानी का रिसाव हो सकता है और इससे मछली उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है।

बांध की मजबूती से तय होती है उत्पादन सफलता

मत्स्य विशेषज्ञों का कहना है कि तालाब का बांध ऐसा होना चाहिए कि अंदर का पानी बाहर न निकले और बाहर का गंदा पानी तालाब में प्रवेश न कर सके। इसके लिए तालाब की सीधी और खड़ी खुदाई से बचना चाहिए। नए तालाब के साथ-साथ पहले से बने तालाब के बांध की भी नियमित देखभाल जरूरी होती है।

वर्म छोड़कर बनाएं मजबूत बांध

मत्स्य विभाग के अनुसार तालाब के चारों ओर पांच से सात फीट जमीन वर्म के रूप में छोड़कर बांध बनाना चाहिए। इससे मिट्टी का कटाव रुकता है और बांध लंबे समय तक मजबूत बना रहता है।

निर्माण से पहले जरूरी तैयारियां

तालाब निर्माण से पहले जमीन को चिन्हित करना और आसपास के पेड़-पौधों को जड़ समेत हटाना जरूरी है। बांध बनाने वाली जगह से घास और झाड़ियां साफ करनी चाहिए। इसके बाद मिट्टी को जोतकर मजबूत आधार तैयार करना चाहिए ताकि बांध टिकाऊ बन सके।

सही तकनीक से करें बांध निर्माण

विशेषज्ञों का कहना है कि बांध को परत-दर-परत मिट्टी डालकर और दबाकर बनाना चाहिए। जहां पानी का दबाव ज्यादा हो, वहां बांध को ज्यादा चौड़ा और मजबूत बनाया जाना चाहिए। बांध की ऊंचाई और चौड़ाई का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि वह लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।

ढलान और रिसाव पर विशेष ध्यान

तालाब के बांध में सही ढलान रखना बेहद जरूरी होता है। अंदर की ओर ढलान निर्धारित अनुपात में होनी चाहिए, जिससे पानी का दबाव संतुलित बना रहे। साथ ही बांध के अंदर चिकनी मिट्टी की परत बनाकर पानी के रिसाव को रोका जा सकता है। तालाब के बांध की सही डिजाइन और समय-समय पर देखभाल से मछली पालन में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है।

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