नई दिल्ली: देश में चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों यानी अप्रैल से दिसंबर के दौरान उर्वरक बाजार में कई अहम संकेत देखने को मिले हैं। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, किसानों तक उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए आयात पर निर्भरता बढ़ी है, जबकि कुछ प्रमुख उर्वरकों के घरेलू उत्पादन में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। उर्वरक बाजार में मांग और आपूर्ति के संतुलन के लिए नीति स्तर पर लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं।
यूरिया की बिक्री में करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी
FAI के मुताबिक, अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान देश में यूरिया की बिक्री 3.12 करोड़ टन से अधिक रही, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 3.8 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि, यह बढ़ोतरी घरेलू उत्पादन के बजाय आयात के सहारे संभव हुई। इस अवधि में यूरिया का घरेलू उत्पादन लगभग 2.24 करोड़ टन रहा, जिसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई, जबकि आयात में 85 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया और यह करीब 80 लाख टन तक पहुंच गया।
एनपी और एनपीके उर्वरकों का उत्पादन बढ़ा
खरीफ और रबी दोनों मौसमों में फसलों की पोषण जरूरतें पूरी करने में आयात की अहम भूमिका रही। डीएपी को छोड़कर एनपी और एनपीके जैसे जटिल उर्वरकों के उत्पादन में करीब 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही इन उर्वरकों के आयात में 120 प्रतिशत से भी अधिक की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। इसके बावजूद इनकी कुल बिक्री लगभग स्थिर बनी रही, जो यह संकेत देती है कि बाजार में मांग सीमित दायरे में ही रही।
डीएपी के घरेलू उत्पादन में गिरावट
डीएपी के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग रही। घरेलू उत्पादन में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि आयात में करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बावजूद डीएपी की बिक्री पिछले वर्ष के मुकाबले कुछ कम रही। इससे संकेत मिलता है कि किसान धीरे-धीरे संतुलित उर्वरक उपयोग की ओर बढ़ रहे हैं और एक ही पोषक तत्व पर निर्भरता कम हो रही है।
पोटाश और एसएसपी में अलग रुझान
पोटाश यानी एमओपी की बिक्री में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जबकि इसके आयात में कमी आई। वहीं, सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के उत्पादन और बिक्री दोनों में दो अंकों की वृद्धि देखी गई, जो स्वदेशी उर्वरक विकल्पों की मजबूत होती भूमिका की ओर इशारा करती है।
संतुलित उर्वरीकरण की ओर संकेत
FAI के महानिदेशक सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि आंकड़ों में दिख रहा पोषक तत्वों का बदलता मिश्रण अधिक संतुलित उर्वरक प्रथाओं की ओर धीरे-धीरे हो रहे बदलाव को दर्शाता है। एसोसिएशन के अनुसार, समन्वित उत्पादन योजना, नियंत्रित आयात और स्वदेशी पोषक तत्वों के विकल्पों को मजबूत करने से संतुलित उर्वरीकरण के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल रही है।
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