मध्य प्रदेश: खरीफ सीजन में यूरिया और डीएपी खाद के लिए किसानों को अब लंबी कतारों, टोकन की परेशानी और जरूरत से ज्यादा खाद खरीदने की मजबूरी से राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने किसानों की समस्याओं को देखते हुए उर्वरक वितरण व्यवस्था में बदलाव करते हुए ई-विकास 2.0 प्रणाली लागू की है। नई व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराना और पूरी वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाना है। नई व्यवस्था के तहत किसान अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक खरीद सकेंगे। इसके साथ ही अतिरिक्त खाद की मांग, टोकन व्यवस्था, उपलब्ध भंडार और खाद उठाने की तारीख से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को भी आसान बनाया गया है।
जबरन कॉम्बो खरीदने की व्यवस्था खत्म
किसानों की प्रमुख शिकायतों में से एक यह रही है कि जरूरत केवल यूरिया या डीएपी की होने के बावजूद कई बार उन्हें दूसरे उर्वरक भी साथ खरीदने के लिए कहा जाता था। इससे किसानों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ता था। ई-विकास 2.0 व्यवस्था में अब किसान अपनी जरूरत के अनुसार किसी भी उर्वरक की स्वतंत्र रूप से खरीद कर सकेंगे। किसी दूसरे उर्वरक के साथ अनिवार्य रूप से जोड़कर खरीदने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
अतिरिक्त खाद मांगने की प्रक्रिया होगी आसान
पहले निर्धारित सीमा से अधिक उर्वरक की मांग करने पर किसानों को पोर्टल पर करीब 50 शब्दों में इसकी वजह बतानी पड़ती थी। ग्रामीण क्षेत्रों के कई किसानों के लिए यह प्रक्रिया मुश्किल होती थी। अब किसान को लंबा कारण लिखने की जरूरत नहीं होगी। अतिरिक्त खाद की आवश्यकता होने पर निर्धारित कारणों में से उपयुक्त कारण का चयन किया जा सकेगा। इसके साथ ही प्रति हेक्टेयर खाद की मात्रा और बैग की गणना भी स्पष्ट रूप से दिखाई जाएगी। पोर्टल पर फसल के अनुसार उर्वरक समूहों की जानकारी उपलब्ध रहेगी। इससे किसानों को अपनी फसल के लिए उपयुक्त खाद का चयन करने में सुविधा मिलेगी।
फसल खराब होने पर दोबारा खाद की सुविधा
प्राकृतिक आपदा, कीट प्रकोप या खराब मौसम के कारण यदि किसान की फसल खराब हो जाती है और दोबारा बोवनी करनी पड़ती है, तो ऐसी स्थिति में अतिरिक्त खाद की आवश्यकता हो सकती है। नई व्यवस्था में इसके लिए विशेष प्रावधान किया गया है। किसान दोबारा खाद की मांग कर सकेंगे और ऐसी मांग को तहसीलदार या अनुविभागीय अधिकारी 48 घंटे के भीतर मंजूरी दे सकेंगे।
टोकन की 300 की सीमा खत्म
डबल लॉक केंद्रों पर पहले प्रतिदिन 300 टोकन की सीमा होने के कारण कई किसानों को समय पर टोकन नहीं मिल पाता था। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले किसानों को कई बार बिना खाद लिए वापस लौटना पड़ता था। अब 300 टोकन की सीमा समाप्त कर दी गई है। मांग के अनुसार इससे अधिक टोकन भी जारी किए जा सकेंगे। साथ ही केंद्रों पर उपलब्ध खाद के भंडार की स्वचालित निगरानी की व्यवस्था भी की गई है। यदि कोई किसान निर्धारित तारीख पर खाद लेने नहीं पहुंच पाता है तो टोकन जारी होने के 24 घंटे बाद उसे ऑनलाइन रद्द करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
मोबाइल संदेश से मिलेगी खाद की जानकारी
किसानों को घर बैठे खाद से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सरकार जल्द ही संदेश आधारित सुविधा शुरू करने की तैयारी कर रही है। किसान मोबाइल से केवल ‘HELP’ या ‘मदद’ लिखकर जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इस सुविधा के माध्यम से खाद के टोकन, नजदीकी विक्रेता, उपलब्ध खाद का भंडार, खाद उठाने की तारीख और टोकन की वैधता जैसी जानकारी हासिल की जा सकेगी। इससे किसानों को बार-बार खाद केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
खाद संबंधी समस्या पर यहां करें संपर्क
ई-विकास पोर्टल या खाद खरीद से जुड़ी किसी समस्या के समाधान के लिए किसान सरकारी कार्य दिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
20 अगस्त से 15 सितंबर तक पंचायतों में लगेंगे शिविर
किसानों को खाद की उपलब्धता और जरूरी दस्तावेजी प्रक्रियाओं के लिए पहले से तैयार करने के उद्देश्य से 20 अगस्त से 15 सितंबर तक पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से कृषि, राजस्व, सहकारिता और पंचायत विभाग के अधिकारी गांवों तक पहुंचकर किसानों की समस्याओं का समाधान करेंगे। किसानों को समय रहते खाद उठाने और जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।
शिविरों में किसानों के होंगे ये काम
- किसानों की किसान पहचान बनाई जाएगी।
- खसरे में छूटे हुए सर्वे नंबर जोड़े जाएंगे।
- किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने में सहायता दी जाएगी।
- प्राथमिक कृषि साख समितियों में नए सदस्यों को जोड़ा जाएगा।
- किसानों के लिए अग्रिम खाद उठाव सुनिश्चित किया जाएगा।
- कृषि संबंधी डिजिटल व्यवस्था से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
किसानों को पहले ही खाद उठाने की अपील
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे बोवनी के समय खाद के लिए होने वाली भीड़ और संभावित परेशानी से बचने के लिए विशेष शिविरों का लाभ उठाएं। किसान समय रहते अपनी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कराने के साथ खाद का अग्रिम उठाव भी कर सकते हैं। ई-विकास 2.0 के जरिए सरकार का लक्ष्य खाद वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और किसान-केंद्रित बनाना है। जबरन दूसरे उर्वरक खरीदने की समस्या, सीमित टोकन और अतिरिक्त खाद मांगने की जटिल प्रक्रिया जैसी परेशानियां दूर होने से खरीफ सीजन में किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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