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उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में चीनी उत्पादन घटा, मिलों की चिंता बढ़ी

Current crushing season in Uttar Pradesh ganna

लखनऊ: देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन के दौरान चीनी उद्योग को बड़ा झटका लगा है। जनवरी महीने में चीनी उत्पादन में इस सीजन की पहली गिरावट दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह गन्ने की उपलब्धता कम होना और खेतों में पैदावार का गिरना बताया जा रहा है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन घटकर 19.45 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 20.10 लाख टन था। अक्टूबर से जनवरी के बीच कुल उत्पादन 55.10 लाख टन रहा, जो बीते साल की तुलना में थोड़ा अधिक है, लेकिन आगे के महीनों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

मिलों पर गन्ने की कमी का असर

एक रिपोर्ट के अनुसार, गन्ने की कमी का असर सीधे मिलों के संचालन पर दिखने लगा है। राज्य की प्रमुख उत्पादक कंपनियों में शामिल बजाज समूह की देवरिया जिले की प्रतापपुर चीनी मिल ने 27 जनवरी को पेराई बंद कर दी। इस मिल की क्षमता 6,000 टीसीडी है, लेकिन इस सीजन में यह पिछले साल की तुलना में काफी कम गन्ना पेराई कर सकी। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में और मिलों को भी समय से पहले बंद करना पड़ सकता है।

किसान कर रहे पैदावार घटने की शिकायत

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान इस बार गन्ने की पैदावार में भारी गिरावट की शिकायत कर रहे हैं। किसानों के अनुसार, रैटून यानी पुराने गन्ने की फसल में कई इलाकों में 30 प्रतिशत तक उपज कम हुई है, जबकि नई यानी प्लांट फसल की शुरुआती कटाई में भी करीब 10 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है। शामली जिले के किसान प्रमजीत सिंह हुड्डा ने बताया कि पिछले साल जहां एक बीघा रैटून गन्ने से 55 क्विंटल उपज मिली थी, वहीं इस बार यह घटकर 38 क्विंटल रह गई है। इसी तरह कई अन्य जिलों से भी पैदावार घटने की खबरें आ रही हैं।

यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन का आकलन

उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय एस. बांका ने कहा कि इस साल राज्य में चीनी उत्पादन पहले के अनुमान से कम रह सकता है, हालांकि यह पिछले साल के स्तर के आसपास ही रहने की संभावना है। उन्होंने बताया कि रैटून फसल में औसतन 15 से 20 प्रतिशत तक पैदावार घटने का अनुमान है, जबकि प्लांट फसल के बारे में स्थिति साफ होने में अभी समय लगेगा। उनके अनुसार, अप्रैल-मई 2025 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुई असामान्य बारिश ने गन्ने की उत्पादकता पर नकारात्मक असर डाला है। गर्मियों में हुई इस बारिश का असर खासकर प्लांट फसल पर ज्यादा पड़ता है।

पेराई और उत्पादन के आंकड़े

राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल महासंघ के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में प्रदेश की मिलों ने 191.86 लाख टन गन्ने की पेराई की, जबकि पिछले साल जनवरी में यह आंकड़ा 212.83 लाख टन था। जनवरी के मध्य तक प्रदेश में 119 चीनी मिलें चालू थीं, लेकिन महीने के अंत तक यह संख्या घटकर 118 रह गई।

उद्योग से जुड़े एक सर्वे के अनुसार, उत्तर प्रदेश की 52 चीनी मिलों में से करीब 67 प्रतिशत मिलें सी-हेवी रूट से चीनी उत्पादन कर रही हैं, जबकि 33 प्रतिशत मिलें बी-हेवी रूट अपना रही हैं। सी-हेवी प्रक्रिया में चीनी रिकवरी अधिक होती है, क्योंकि इसमें मोलासिस में सुक्रोज की मात्रा बेहद कम रह जाती है।

देशभर के उत्पादन पर भी असर

भारतीय शुगर और बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2025-26 सीजन में देश में कुल चीनी उत्पादन 343.5 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले सीजन से कम है। इथेनॉल के लिए चीनी डायवर्जन के बाद शुद्ध उत्पादन 309.5 लाख टन रहने की संभावना जताई गई है। उत्तर प्रदेश में भले ही शुरुआत में बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन अब मौसम की मार और गन्ने की घटती पैदावार ने चीनी उद्योग की चिंता बढ़ा दी है।

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