लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ओर से तिलहन और दलहन की खेती को लगातार प्रोत्साहन दिए जाने के सकारात्मक परिणाम अब आंकड़ों के रूप में सामने आने लगे हैं। राज्य सरकार की रणनीति साफ है – तिलहन और दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना। इसके लिए किसानों को जहां प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वहीं उन्नत प्रजातियों के कीट और रोग प्रतिरोधक बीज भी अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही कृषि यंत्रों पर भी सब्सिडी दी जा रही है। राज्य सरकार की इन कोशिशों का असर खरीफ के मौजूदा सीजन में साफ तौर पर दिख रहा है।
प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ. पंकज कुमार त्रिपाठी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 के खरीफ सीजन में तिलहन की प्रमुख फसलों जैसे – तिल, मूंगफली और सोयाबीन की बोआई का कुल रकबा 547.144 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यही आंकड़ा 432.250 हजार हेक्टेयर था। यानी एक साल में बोआई के कुल रकबे में करीब सवा गुना की वृद्धि दर्ज की गई है। तिल की खेती ने इस वृद्धि में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। साल 2024 में तिल की बोआई 180.26 हजार हेक्टेयर में हुई थी, जो मौजूदा सीजन में बढ़कर 303 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गई है। यह वृद्धि डेढ़ गुना से भी अधिक है। इसी तरह, मूंगफली का रकबा 204 हजार से बढ़कर 218 हजार हेक्टेयर और सोयाबीन का रकबा 34.12 हजार से बढ़कर 40 हजार हेक्टेयर तक पहुंच चुका है।
जहां तक दलहनी फसलों की बात है, उसमें भी अच्छी वृद्धि देखने को मिल रही है। अरहर की खेती किसानों की पसंदीदा बनी हुई है। अभी इसके बोआई का समय बाकी है, जिससे अनुमान है कि रकबा और बढ़ेगा। फिलहाल अरहर की बोआई 184 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 273 हजार हेक्टेयर हो गई है। मूंग की बोआई में भी मामूली वृद्धि हुई है, जो 30 हजार से बढ़कर 32 हजार हेक्टेयर पर पहुंची है, जबकि उर्द की खेती तुलनात्मक रूप से कम हो रही है। खरीफ की अन्य प्रमुख फसलों जैसे – धान, मक्का और कपास के बोआई रकबे में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। धान का रकबा 4193 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 5546 हजार हेक्टेयर और मक्का का रकबा 636 हजार से 701 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। दिलचस्प बात यह है कि अब कपास की खेती में भी किसानों की रुचि बढ़ रही है। पिछले साल सात हजार हेक्टेयर में कपास की बोआई हुई थी, जो इस बार 18 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गई है।
कुल मिलाकर देखें तो खरीफ की फसलों का कुल बोआई रकबा पिछले साल 6574 हजार हेक्टेयर था, जो इस साल बढ़कर 8262 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार की कृषि नीति न सिर्फ तिलहन और दलहन के क्षेत्र में, बल्कि अन्य फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में भी कारगर साबित हो रही है।
