नई दिल्ली: रबी के मौसम में चना किसानों की एक बेहद जरूरी और लाभकारी फसल मानी जाती है। सही समय पर देखभाल और वैज्ञानिक तरीके अपनाने से चने की खेती बेहतर पैदावार देती है, लेकिन बुवाई के बाद शुरुआती 40–45 दिन इस फसल के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। खासकर पहले 22 दिन अगर किसान सतर्क नहीं रहे, तो पूरी फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। इस दौरान मिट्टी से फैलने वाली कई बीमारियां छोटे पौधों पर हमला कर देती हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है।
अंकुरण के बाद 22 दिन क्यों होते हैं सबसे खतरनाक
चना बोने के बाद जब किसान पहली बार सिंचाई करते हैं, उसी समय फसल में बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। नमी बढ़ने से मिट्टी में मौजूद रोगजनक सक्रिय हो जाते हैं और छोटे पौधों के तने तथा जमीन से जुड़े हिस्से में संक्रमण शुरू हो जाता है। अगर इस अवस्था में समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो पौधे धीरे-धीरे सूखकर मरने लगते हैं और खेत में खाली जगह बनने लगती है।
कॉलर रॉट बीमारी से जड़ के पास सड़ जाता है पौधा
कॉलर रॉट चना की एक गंभीर बीमारी है, जिसमें पौधे का निचला हिस्सा सड़ने लगता है। जहां तना और जमीन आपस में मिलते हैं, वहां सफेद रूई जैसे फफूंद दिखाई देने लगते हैं। धीरे-धीरे यह संक्रमण पूरे पौधे को अपनी चपेट में ले लेता है और पौधा सूखकर खत्म हो जाता है। ज्यादा नमी और बार-बार पानी मिलने की स्थिति में यह बीमारी तेजी से फैलती है और एक साथ कई पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है।
ड्राई रूट रॉट में जड़ें काली होकर टूटने लगती हैं
ड्राई रूट रॉट बीमारी में पौधा ऊपर से सूखने लगता है, जिससे किसान अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। जब ऐसे पौधे को जमीन से निकालकर देखा जाता है, तो उसकी जड़ें काली पड़ चुकी होती हैं। जड़ें इतनी कमजोर हो जाती हैं कि हल्के से छूने पर ही टूट जाती हैं। इस कारण पौधा मिट्टी से पोषण नहीं ले पाता और उसकी बढ़वार रुक जाती है।
उगटा रोग या चना विल्ट से फूल आने पर होता है हमला
उगटा रोग, जिसे चना विल्ट भी कहा जाता है, आमतौर पर फूल आने के समय दिखाई देता है। इस बीमारी में पौधा अचानक मुरझा जाता है और कुछ ही समय में सूख जाता है। यह रोग भी मिट्टी से फैलता है और अगर खेत में एक पौधा संक्रमित हो जाए, तो धीरे-धीरे आसपास की फसल भी इसकी चपेट में आ सकती है।
मिट्टी और बीज उपचार से ही संभव है प्रभावी बचाव
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, चना की फसल को इन गंभीर बीमारियों से बचाने का सबसे कारगर तरीका है मिट्टी और बीज का सही उपचार। अगर किसान बुवाई से पहले ही यह सावधानी बरत लें, तो शुरुआती दौर में होने वाले नुकसान से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है और उत्पादन में कमी नहीं आती।
बीज उपचार का आसान और असरदार तरीका
चना बोने से पहले 1 किलो बीज में 10 ग्राम राइजोबियम मिलाकर अच्छी तरह उपचार करें और बीज को 15 से 20 मिनट तक ऐसे ही छोड़ दें। इसके बाद ट्राइकोडर्मा पाउडर बीज के ऊपर डालकर अच्छी तरह मिलाएं। जब बीज पूरी तरह सूख जाए, तभी उसकी बुवाई करें। यह तरीका मिट्टी से फैलने वाली बीमारियों से बचाव में काफी मददगार साबित होता है।
समय पर सावधानी बरतेंगे तो बढ़ेगी चना की पैदावार
अगर किसान शुरुआती 22 दिनों में विशेष ध्यान दें और बीज व मिट्टी का सही उपचार करें, तो चना की फसल को कॉलर रॉट, ड्राई रूट रॉट और उगटा रोग जैसी बीमारियों से बचाया जा सकता है। इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं, खेत में पौधों की संख्या बनी रहती है और अंत में पैदावार भी बेहतर मिलती है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर किसान बड़े नुकसान से खुद को बचा सकते हैं।
ये भी पढ़ें: वेजफेड बिहार के किसानों से खरीदेगा 20 हजार मीट्रिक टन टमाटर
