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उत्तर प्रदेश में शुरू होगा गो आधारित हरित अर्थव्यवस्था अभियान

Biogas

लखनऊ, 20 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश में गो आधारित हरित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक हजार से अधिक घरों में लघु जैव गैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। योजना के अंतर्गत स्थायी और चलित दोनों प्रकार के संयंत्र लगाए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी पहल में तकनीकी सहयोग के लिए देश के प्रमुख शिक्षण संस्थान का साथ लिया जाएगा, जबकि इस क्षेत्र में कार्यरत पंद्रह से अधिक अग्रणी औद्योगिक संस्थानों ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में इस परियोजना से जुड़ने में रुचि दिखाई है। साथ ही ग्रामीण परिवारों को संयंत्र लगाने के लिए अनुदान उपलब्ध कराने की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।

तकनीकी सहयोग से मिलेगा अभियान को नया आधार

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता तकनीकी और औद्योगिक सहयोग है। अभियान के तहत जैव गैस संयंत्रों की तकनीक, संचालन, रखरखाव और युवाओं के प्रशिक्षण की व्यापक व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही इस क्षेत्र में कार्यरत अनेक प्रमुख औद्योगिक संस्थान ग्रामीण क्षेत्रों में परियोजना के विस्तार और क्रियान्वयन में भागीदारी करेंगे। इससे आधुनिक तकनीक का लाभ सीधे गांवों तक पहुंचेगा और परियोजना का प्रभाव अधिक व्यापक होगा।

प्रत्येक संयंत्र पर आएगा 25 से 40 हजार रुपये तक खर्च

योजना के अनुसार एक लघु जैव गैस संयंत्र स्थापित करने पर लगभग पच्चीस हजार से चालीस हजार रुपये तक का व्यय आएगा। सरकार ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम कर रही है, जिससे अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें।

युवाओं के लिए खुलेंगे नए रोजगार के अवसर

अभियान के तहत प्रदेश के युवाओं को जैव गैस संयंत्रों की स्थापना, संचालन और रखरखाव का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे प्रशिक्षित तकनीकी कार्यबल तैयार होगा, जो भविष्य में इस क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार दोनों के अवसर प्राप्त कर सकेगा। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को भी इस योजना से नई आय के साधन उपलब्ध होने की संभावना है।

रसोई ईंधन की बचत और खेती को मिलेगा लाभ

जैव गैस संयंत्रों से तैयार गैस का उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में किया जाएगा, जिससे ग्रामीण परिवारों का रसोई ईंधन पर होने वाला खर्च कम होगा। वहीं संयंत्रों से निकलने वाला अवशेष उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में खेतों में उपयोग किया जाएगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

ग्रामीण आत्मनिर्भरता को मिलेगी नई मजबूती

गो सेवा आयोग का मानना है कि यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ जैविक खाद के उत्पादन को भी बढ़ावा देगा। सरकार की योजना है कि अनुदान के माध्यम से अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को इस योजना से जोड़ा जाए, ताकि गांवों में ऊर्जा और कृषि दोनों क्षेत्रों में स्थायी विकास सुनिश्चित हो सके।

गोशालाएं बनेंगी ऊर्जा और संसाधन केंद्र

योजना के तहत प्रदेश की गोशालाओं को ऊर्जा और संसाधन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां गोबर से जैव गैस, जैव ईंधन, जैविक खाद और भविष्य में कार्बन आधारित प्रोत्साहन जैसी संभावनाओं पर भी कार्य किया जाएगा। राज्य सरकार का उद्देश्य गो आधारित उत्पादों को ग्रामीण आय, ऊर्जा और रोजगार का स्थायी स्रोत बनाकर उत्तर प्रदेश को गो आधारित हरित अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है।

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