पटना: बिहार की प्रसिद्ध लीची इस बार कई चुनौतियों का सामना कर रही है। राज्य में करीब 32 से 36 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लीची की खेती होती है, लेकिन इस वर्ष लीची उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। किसानों के अनुसार इस बार लीची उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में लगभग आधा रह गया है, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई है। वहीं, लीची व्यापार से जुड़े लोग निर्यात के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं के अभाव को सबसे बड़ी समस्या बता रहे हैं।
निर्यात के लिए नहीं मिल रहीं पर्याप्त सुविधाएं
बिहार लीची ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बच्चा सिंह का कहना है कि लीची निर्यात को लेकर न तो पर्याप्त सरकारी पहल की गई है और न ही जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। अधिकांश किसानों को यह जानकारी भी नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए लीची के गुणवत्ता मानक क्या हैं और निर्यात की प्रक्रिया कैसे पूरी की जाती है। राज्य में अभी तक ऐसा आधुनिक पैक हाउस विकसित नहीं हो सका है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो। पटना के बिहटा में बना पैक हाउस भी पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है, जिससे निर्यात की संभावनाएं सीमित हो रही हैं।
परिवहन और उड़ान सुविधाओं की भारी कमी
लीची कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार से सीधे अंतरराष्ट्रीय निर्यात के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। लीची को पहले दूसरे राज्यों तक भेजना पड़ता है, फिर वहां से विदेशों में निर्यात किया जाता है। व्यापारियों के अनुसार, राज्य के हवाई अड्डों से नियमित अंतरराष्ट्रीय मालवाहक उड़ान की सुविधा नहीं है, जिससे लागत बढ़ जाती है और समय भी अधिक लगता है। लीची जैसे नाजुक फल के लिए यह बड़ी चुनौती बन जाती है।
बढ़ती लागत और घटती गुणवत्ता से नुकसान
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिहार में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की परिवहन और भंडारण सुविधाएं उपलब्ध हों, तो लीची को कम समय में विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे न केवल लागत घटेगी, बल्कि फल की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहेगी। वर्तमान में लीची को दूसरे राज्यों के हवाई अड्डों के माध्यम से भेजने के कारण किसानों और व्यापारियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, जिससे उनका मुनाफा कम हो रहा है।
अनुसंधान केंद्र की पहल, लेकिन चुनौतियां बरकरार
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र द्वारा लीची को विदेश भेजने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए विशेष पैकेजिंग तकनीक विकसित की गई है, जिससे लीची की गुणवत्ता कुछ दिनों तक सुरक्षित रखी जा सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित नहीं होतीं, तब तक अन्य राज्यों पर निर्भरता बनी रहेगी।
लगातार घट रहा लीची निर्यात
आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में लीची निर्यात में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आधुनिक पैक हाउस, कोल्ड चेन नेटवर्क, परिवहन सुविधाएं और किसानों को निर्यात संबंधी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, तो बिहार की लीची वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकती है। उत्पादन में कमी और निर्यात सुविधाओं के अभाव के कारण इस बार बिहार की लीची किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।
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